पीलीभीत

Pilibhit News: 10 करोड़ बहाकर भी नहीं बहा सके गोमती नदी की अविरल धारा

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Even after shedding Rs 10 crore, the continuous stream of Gomti river could not be washed away.

गोमती उद्धगम स्थल । संवाद

कलीनगर। नदियों को पुनर्जीवित करने के दावों के बीच राजधानी लखनऊ की शान गोमती नदी का जीवन अपने उद्गम स्थल पर ही संकट में है। अस्तित्व खोती जा रही इस सदानीरा को पुनर्जीवित करने के लिए श्रमदान से लेकर मनरेगा के तहत खोदाई भी कराई गई। लगभग 10 करोड़ रुपये बहा दिए गए, लेकिन नदी नहीं बह सकी।

अब सिर्फ उद्गम स्थल पर कराए जा रहे विकास कार्यों ही इसकी पहचान को जिंदा रखे हैं। कलीनगर तहसील के माधोटांडा से सटे फुलहर गांव में ऐतिहासिक गोमती नदी का उद्गम स्थल है। अतीत पर नजर डालें तो करीब चार दशक पहले तक नदी अपने पूरे वेग से बहती थी। गोमती राजधानी लखनऊ की शोभा थी। उद्गम स्थल से 960 किलोमीटर की लंबा सफर तय करके गाजीपुर के पास गंगा नदी में मिल जाती है।

उद्गम स्थल से शाहजहांपुर तक गोमती नदी का प्रवाह धीमा रहता था, लेकिन इससे आदे बढ़ने पर तमाम सहायक नदियों और नालों के मिल जाने से नदी पूरे वेग से बहने लगती थी। अब समय के साथ यह जीवदायिनी अस्तित्व खोती जा रही है। नदी की जमीन पर कब्जे होने लगे है। उद्गम स्थल की तीन झीलों में 15 से ज्यादा प्राकृतिक स्रोत हैं। इनमें महज दो-तीन ही चालू हैं। इनसे भी न के बराबर पानी आता है। जल स्रोत बंद होने के कारण नदी सूख गई है।

कई सालों तक अस्तित्व बचाने के लिए प्रयास ही नहीं किए गए। इससे जनपद और उसके पड़ोस के जिलों में भी गोमती नदी सरकारी फाइलों से गायब होने लगी। वर्ष 2018 में पीलीभीत के तत्कालीन डीएम डॉ. अखिलेश मिश्रा ने गोमती को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। श्रमदान से खोदाई शुरू कराई। उद्गम स्थल के सौंदर्यीकरण पर जोर दिया।

ट्रस्ट के गठन के साथ ही गोमती मंदिर स्थापित कराया। इसके बाद आए डीएम पुलकित खरे ने भी उद्गम स्थल पर विकास कार्य कराए। मनरेगा से खोदाई कराई, लेकिन नदी की धारा नहीं बह सकी। प्रशासन की पैरवी के बाद शासन से यहां बहुउद्देशीय हाल मंजूर हुआ। इसका अभी निर्माण कार्य जारी है। (संवाद)

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सपा शासन में नहर को नदी से जोड़ने के हुए थे प्रयास

सपा सरकार में सिंचाई मंत्री रहे शिवपाल सिंह यादव ने 2014-15 में गोमती उद्गमस्थल का दौरा किया था। यहां से जल धारा प्रवाहित करने के लिए हरदोई ब्रांच नहर की सहायक रजवाहा नहर के माध्यम से नदी में पानी पहुंचाने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च कर खोदाई कराई गई। इसके अलावा सात करोड़ की लागत से उद्गम स्थल पर झीलों की सफाई कराई गई। इससे सौंदर्यीकरण तो हुआ लेकिन जलधारा का प्रवाह नहीं हो सका।

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जल पुरुष से लेकर वाटर वूमन के प्रयास भी नहीं दे सके जीवन

गोमती नदी की धारा को अविरल बहाने के लिए जलपुरुष राजेंद्र कुमार ने भी कई अभियान चलाए। अफसरों के साथ बैठक कर योजना भी बनाई, लेकिन यह धरातल पर नहीं उतर सकी। हाल ही में करीब तीन माह पहले वॉटर वूमन शिप्रा पाठक ने भी उद्गम स्थल से लेकर गोमती की अंतिम सीमा तक पैदल यात्रा की। उन्होंने अवैध कब्जे को लेकर दुख जताया। एक माह पूर्व कलीनगर एसडीएम आशुतोष गुप्ता ने कलीनगर और पूरनपुर तहसील की संयुक्त टीम को कब्जों को चिह्नित करने के लिए लगाया। इस दौरान कई स्थानों पर कब्जे भी मिले, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है।

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बनारस की तर्ज पर आरती ने बढ़ाई उद्गम स्थल की रौनक

वर्ष 2021 में यहां डीएम रहे पुलकित खरे ने गोमती उद्गम स्थल पर बनारस की तर्ज पर आरती शुरू कराई। पहली आरती बनारस से पंडितों को बुलाकर कराई गई। इसके बाद से रोजाना शाम को यहां बनारस के घाट की तर्ज पर आरती होती है। रोजाना शाम को होने वाली आरती के चलते उद्गम स्थल पर रौनक बनी रहती है।

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गोमती नदी की जमीन से कब्जे हटाने के प्रयास शुरू किए गए हैं। इसके लिए पूरनपुर तहसील से रिपोर्ट आने इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई पर अमल किया जाएगा। – आशुतोष गुप्ता, एसडीएम कलीनगर


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