Bareilly News: वैकल्पिक इंतजाम से पहले ही छीना काम शहर के 55 हजार घरों से नहीं उठा कूड़ा
बरेली। यूजर चार्ज जमा न करने की वजह से नगर निगम ने फर्म आनंद नारायण साहू को काली सूची में डालकर उससे काम छीन लिया गया। वैकल्पिक इंतजाम के अभाव में बृहस्पतिवार को आधे शहर में कूड़ा उठान का सिस्टम ध्वस्त हो गया। 37 वार्डों के 55 हजार घरों से कूड़े का उठान नहीं हुआ।
शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और यूजर चार्ज वसूलने की जिम्मेदारी 15 दिसंबर 2019 को निजी फर्म आनंद नारायण साहू को सौंपी गई थी। फर्म को नगर निगम से समय पर भुगतान नहीं मिला तो उसने दो कराेड़ रुपये से अधिक का यूजर चार्ज दबा लिया। इस पर निगम ने फर्म का तीन करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया। निगम व फर्म एक-दूसरे को पत्र लिखते रहे पर समाधान नहीं हो सका।
अंतत: नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने फर्म को काली सूची में डालने तथा यूजर चार्ज जमा नहीं करने पर एफआईआर कराने के आदेश दिए। निर्देश को सात दिन बीत गए पर रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। अलबत्ता बुधवार शाम को फर्म से काम छीन लिया गया। पत्र लिखकर निगम के संसाधनों को जमा कराने के लिए भी कहा गया है।
राजीव कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी डीपी सिंह ने बताया कि कूड़ा उठान के लिए सुपरवाइजर को फोन किया तो उसने बताया कि उसकी फर्म का अनुबंध खत्म हो गया है। निगम में फोन किया तो भी कूड़ा नहीं उठा। गली में गंदगी फैली है। दुर्गंध की वजह से बीमारियां फैलने का खतरा है। सिविल लाइंस निवासी प्रशांत कुमार ने बताया कि तीन दिन से कूड़ा नहीं उठा।
श्यामगंज पुल के नीचे पड़ा कूड़ा बृहस्पतिवार को नहीं उठा। ग्राहक और दुकानदार दिनभर परेशान हुए। कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बाहर कूड़ा पड़ा था। ग्राहकों को भी दिक्कत हुई। चौपुला पुल के नीचे से कूड़ा नहीं उठा। कूड़े के बीच से ही दिनभर लोग गुजरते रहे। बदबू से बचने के लिए कई लोग मुंह पर रुमाल रखकर निकले। सुभाषनगर थाने के करीब मुख्य मार्ग पर कूड़े का ढेर लगा है।
अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर निजी फर्म को ब्लैक लिस्ट कर नई फर्म के चयन के लिए टेंडर निकाले गए हैं। नई फर्म का चयन नहीं होने तक निगम के नियमित कर्मचारी कूड़ा उठाएंगे। वैकल्पिक व्यवस्था दो-तीन दिन में प्रभावी हो जाएगी। निजी फर्म से नगर निगम अपने वाहन वापस ले रहा है ताकि व्यवस्था संचालन में कोई दिक्कत न आए। – अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
समय रहते फर्म की दिक्कत को समझा गया होता तो यह नौबत नहीं आती। हमने भुगतान नहीं मिलने के बाद भी काम किया है। अब हम निगम के संसाधन लौटा रहे हैं। नगर निगम यूजर चार्ज काटकर हमारा भुगतान कर दे तो समस्या का समाधान हो जाएगा। वैसे भी हमारा अनुबंध 30 अप्रैल को ही खत्म हो गया था। निगम के कहने पर फर्म घाटे के बाद भी काम करती रही। – आनंद नारायण साहू, निजी फर्म के संचालक


