बदायूं

Budaun News: लापरवाही की इंतिहा… आठ साल में भी मेडिकल कॉलेज का काम पूरा नहीं, मान्यता पर संकट

Connect News 24

End of negligence, work of medical college not completed even in eight years, crisis on recognition

राजकीय मेडिकल कॉलेज।

बदायूं। उत्तर प्रदेश निर्माण निगम की लापरवाही के चलते आठ साल में मेडिकल कॉलेज का 60 फीसदी ही निर्माण कार्य हो सका है। 40 फ़ीसदी निर्माण कार्य अब भी लटका हुआ है। समय रहते अगर निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया तो मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में एमबीबीएस के 500 छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और जिलाधिकारी कई बार शासन को पत्र भी भेज चुके हैं, लेकिन अधूरा निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है।

जिले को राजकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात वर्ष 2012 में सपा शासनकाल में मिली थी। बरेली-मथुरा हाईवे पर गांव गिनौरा वाजिदपुर के पास जमीन मिलने पर 2015 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू किया गया। शासन ने निर्माण कार्य का जिम्मा उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपा। इसके लिए 646 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। वर्ष 2017 तक मेडिकल कॉलेज का लगभग आधा काम ही पूरा हो सका, लेकिन मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू कर दिया गया।

मेडिकल कॉलेज को मान्यता इस शर्त पर दी गई थी कि एक साल के अंदर बाकी निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हर साल मान्यता का नवीनीकरण निर्माण कार्य जल्द पूरा होने का वादा कर कराया जाता रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका। स्थाई मान्यता के लिए यह अंतिम वर्ष है। अगर इस बार नवीनीकरण होने तक राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका तो मान्यता रद्द हो सकती है। ऐसा हुआ तो यहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। खास बात यह है कि बजट की 95 फीसदी रकम भी शासन से निर्माण निगम को अदा की जा चुकी है।

निर्माण कार्य पूरा न होने से चारों ओर अव्यवस्था

राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य अधर में लटका होने से परिसर में हर तरफ अव्यवस्था है। जहां-तहां निर्माण सामग्री के ढेर लगे हैं। गंदगी भी बढ़ रही है। कॉलेज के प्राचार्य अपने स्तर से कैंपस में सफाई कराते हैं, लेकिन धूल के गुबार उड़ते रहने से सफाई व्यवस्था चौपट हो जाती ह। निर्माणाधीन बिल्डिंग में गंदगी से छात्र-छात्राओं समेत स्टाफ को भी परेशानी हो रही है।

बाउंड्रीवॉल भी अधूरी

मेडिकल कॉलेज की बाउंड्रीवॉल तक नहीं बन सकी है। कॉलेज के आसपास खेत हैं। इससे छुट्टा पशु अक्सर कॉलेज में घुस आते हैं। पशुओं के विचरण से रोगियों के साथ ही विद्यार्थियों को भी खतरा बना रहता है।

चूहों का भी आतंक

मेडिकल कॉलेज में चूहों का भी आतंक है। यहां कागजों से लेकर आईसीयू में भर्ती मरीज भी सुरक्षित नहीं हैं। फाइलों के कुतरने के अलावा आईसीयू में भर्ती एक मरीज के पैर का मांस भी चूहे खा चुके हैं।

ये कार्य होने हैं बाकी

– दो लेक्चर रूम का निर्माण।

-शौचालय में एसटीपी का कार्य।

– मल्टी परपज हॉल, खिड़कियां और फाॅल सीलिंग का काम।

– 11 लिफ्ट लगाने का काम।

– लेक्चर थियेटर निर्माण।

– पांच टावर का निर्माण।

– सात ऑपरेशन थियेटर का निर्माण।

मानक के अनुसार अन्य कमियां

– एसटीपी प्लांट चालू नहीं है। इससे मरीजों को असुविधा होती है। गंदगी के चलते एनजीटी से दंडित होने की आशंका रहती है।

– नर्सिंग छात्रावास में केवल आंशिक रूम उपलब्ध है।

– इंटर्न हॉस्टल का कार्य अपूर्ण है।

– परिसर में निर्माण कार्य का मलबा इकट्ठा होने के कारण मच्छर, गंदगी और चूहों की समस्या है।

– कैंपस में सड़क निर्माण का कार्य अधूरा है।

पुराने ठेकेदार ने कोर्ट में दायर कर रखा है वाद

उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के मुख्य ठेकेदार दरबान सिंह राना का कहना है कि निगम ने पहले अनिल कुमार एंड कंपनी को निर्माण का ठेका दिया था। अनिल ने निर्माण कार्य में शिथिलता बरती तो उसका भुगतान रोक दिया गया। इस पर उसने कोर्ट में वाद दायर कर दिया। विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मामले को जल्द निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

वर्जन

निर्माण के मामले में हम ठेकेदार को नहीं जानते। हमें तो उत्तर प्रदेश निर्माण निगम से मतलब है। शासन से लगातार डीएम के माध्यम से व खुद छात्र-छात्राओं के भविष्य का हवाला देकर पत्राचार किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा न होने से मान्यता के नवीनीकरण में बाधा आने की आशंका है। इसकी सूचना प्रमुख सचिव शासन को भेजी जा चुकी है। डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज।

राजकीय मेडिकल कॉलेज।


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