Budaun News: गोशाला में एक हफ्ते में भूख से मर गईं दो गायें

ग्राम बनकोटा में गोशाला में हौज में भरे पानी की जांच करते एसडीएम विजय कुमार मिश्र। संवाद
वजीरगंज। ग्राम पंचायत बनकोटा में बनी गोशाला में एक हफ्ते में दो गोवंश भूख से तड़पकर अपनी जान दे चुके हैं। इसका वीडियो वायरल हुआ तो जिम्मेदारों की नींद टूटी। पशु चिकित्सक ने भी गोवंशों के भूख से मरने की पुष्टि की है। बुधवार को एसडीएम ने औचक निरीक्षण किया। पता चला कि वहां हरा चारा तो दूर भूसा तक नहीं था।
गो आश्रय स्थल में गोवंशों की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। हालात ये हैं कि गो आश्रम स्थल में हरा चारा तो छोड़िए सूखा भूसा तक नसीब नहीं हो पा रहा है। हाल ये तब हैं जब शासन द्वारा प्रति गोवंश 30 रुपये प्रतिदिन चारे के लिए दिए जा रहे हैं। बुधवार को ग्राम पंचायत बनकोटा में बने गो आश्रय स्थल का वीडियो वायरल हुआ। इसमें चारे के अभाव में गोवंशों के मरने की बात कही जा रही थी। इस पर बिसौली के एसडीएम विजय कुमार मिश्र ने गो आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया तो पाया कि वीडियो सही है।
गो आश्रय स्थल में हरा चारा को दूर वहां भूसे का एक तिनका तक नहीं था। गोवंशों की हालत भी बेहद खराब थी। मौजूदा स्थिति को देखकर कर एसडीएम ने मौके पर ही प्रधान प्रमिला यादव और उनके पति विनीत की जमकर लताड़ लगाई। एसडीएम के निर्देश पर आनन-फानन में कुछ भूसे की व्यवस्था की गई। जैसे ही गोवंशों के आगे भूसा डाला गया तो एक दम सभी गोवंश सूखे भूसे को खाने के लिए टूट पड़े। इसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।
उधर, एसडीएम के निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सक को भी मौके पर बुला लिया गया था। गोशाला में मरणासन्न अवस्था में पड़ी गोवंश को देखकर डॉक्टर ने उसकी जांच की। तो उन्होंने बताया कि गोवंश कई दिनों से भूूखे हैं, जिसकी वजह से उनकी हालत हालत खराब हो गई है।
ऐसे होता है गोवंश मरने के बाद भी संख्या पूरी करने का खेल
भूख या बीमारी से मरने के बाद में गोशालाओं में निरीक्षण के दौरान अधिकांशत: गोवंश पूरे मिलते हैं। ऐसे में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाती है कि जो गोवंश मरा है वह छुट्टा है या फिर गोशाला का। क्योंकि गोवंश के मरने के बाद उन्हें जंगल में फेंक दिया जाता है। साथ ही संख्या पूरी रहे, इसके लिए छुट्टा गोवंश को पकड़कर रख लिया जाता है।
कमरों में बैठक डॉक्टर भी करते हैं कागजी कार्रवाई
शासन के निर्देशों के अनुसार, डॉक्टरों को संबंधित गोशालाओं को नियमित निरीक्षण करते रहना है ताकि वहां पर गोवंशों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले एक माह से धीरे-धीरे गो आश्रय स्थल की स्थिति खराब हो रही है, पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। ऐसे में डॉक्टर भी गो आश्रय स्थल न जाकर केवल कमरों में बैठकर रिपोर्ट बना देते हैं।
गो आश्रय स्थल का निरीक्षण किया है। वहां पर स्थिति अत्यंत खराब थी। इसको लेकर प्रधान को निर्देशित किया। साथ ही उच्च अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी दी जाएगी।
-विजय कुमार मिश्र, एसडीएम

ग्राम बनकोटा में गोशाला में हौज में भरे पानी की जांच करते एसडीएम विजय कुमार मिश्र। संवाद