केसीएमटी कैंपस -2 में किया गया “टेक्सॉनोमी ऑफ एजूकेशनल ओब्जेक्टिवस्” कार्यशाला का आयोजन |
पीo जीo आईo ऑफ़ मैनेजमेंट में किया गया बी. एड. के छात्रों के लिए " टेक्सॉनोमी ऑफ एजूकेशनल ओब्जेक्टिवस् " कार्यशाला का आयोजन |
प्रेम प्रकाश गुप्ता इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी , केसीएमटी कैंपस -2 में बीo एडo के छात्रों के लिए “टेक्सॉनोमी ऑफ एजूकेशनल ओब्जेक्टिवस् ” कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया | कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ प्रवीण रस्तोगी तथा विभाग के समस्त शिक्षक डॉ संजीव कुमार, वेद प्रकाश शर्मा एवं प्राची पाठक उपस्थित रहे।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर प्रवीन रस्तोगी ने बीo एडo के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए “टैक्सोनॉमी आफ एजुकेशनल ऑब्जेक्टिव्स” नामक कार्यशाला का आयोजन किया। उसमें उन्होंने बताया कि बीo एडo के छात्रों के लिए टैक्सोनॉमी क्यों आवश्यक है? टैक्सनॉमी को विस्तार से समझाते हुए बताया कि ब्लूम टैक्सोनॉमी को तीन भागों(ज्ञानात्मक पक्ष, भावात्मक पक्ष, मनोगत्यात्मक पक्ष) में विभाजित किया जाता है | उसके बाद उन्होंने एक-एक डोमेन को छात्रों के सामने प्रस्तुत किया। ज्ञानात्मक, भावात्मक, साइको मोटर यानी मानोगात्मक को 3H से दर्शाया जाता है | ब्लूम टैक्सनॉमी छात्रों के बौद्धिक विकास में योगदान देती है , इसके वर्गीकरण के उपयोग से छात्र एक विषय को अपने तरीके से समझा सकता है और उसके समाधानों पर अपनी सोच से विचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि संज्ञानात्मक डोमेन में ज्ञान और बौद्धिक कौशल का विकास शामिल होता है। इसकी छ: श्रेणियां है – ज्ञान, समझ ,उपयोग ,विश्लेषण ,मूल्यांकन और संश्लेषण को उदाहरण के साथ बहुत ही आसान तरीके से समझाया।

भावनात्मक पक्ष के 6 भाग होते हैं – प्राप्त करना,प्रतिक्रिया, मूल्य निर्धारण, संकल्पना,संगठन और मूल्य प्रणाली की विशेषता । इसी के साथ ही उन्होंने बताया कि भावात्मक क्षेत्र सीखने के भावनात्मक और व्यवहार संबंधी पहलुओं से संबंधित होता है। इसके अंतर्गत किसी विषय या मुद्दे के लिए प्रशंसा विकसित करना,किसी दशा या अनुभव के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रिया प्रदर्शित करना, सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करना, नए दृष्टिकोणीय मूल्यों को स्वीकार करना तथा किसी के विश्वास या मूल्य के आधार पर जिम्मेदारी से कार्य करना जैसे गुणों का विकास होता है।

उद्दीपन,कार्य करना,नियंत्रण, समायोजन, स्वाभावीकरण, आदत पड़ना जैसे भाग मनोगत्यात्मक पक्ष के होते हैं। उनके बारे में प्राचार्या महोदया ने आगे बताते हुए कहा कि मनोगत्यात्मक पक्ष एक छात्र के शारीरिक कौशल का विकास करता है, कई उदाहरण देते हुए उनहोंने कहा कि क्रियात्मक डोमेन के अंतर्गत शारीरिक गतिविधि के माध्यम से कौशल का, निपुणता का, प्रदर्शन करना,समन्वय और संतुलन विकसित करना आदि महत्वपूर्ण होता है।इसी के साथ उन्होंने बताया कि 2001 में ब्लूम टैक्सनॉमी में कुछ संशोधन किया गया। ज्ञानात्मक पक्ष में ‘संश्लेषण’ के स्थान पर ‘रचना’ शब्द का प्रयोग किया गया और उसे मूल्यांकन के बाद लिखा गया। ब्लूम के वर्गीकरण में ब्लूम ने छात्रों के ज्ञान एवं बौद्धिक पक्ष पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है। इन तीनों डोमेन का मुख्य उद्देश्य किसी भी छात्र का सर्वागीण विकास करना होता है। कार्यालय के अंत में विभाग के प्रवक्ता डॉक्टर संजीव कुमार शर्मा जी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन दिया।



