Shahjahanpur News: परंपरागत खेती छोड़कर मधुमक्खी पालन ने बदली किसानों की जिंदगी

शाहजहांपुर में मधुमक्खी के बक्से के साथ किसान
शाहजहांपुर। किसानों ने अपनी परंपरागत खेती को छोड़कर मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया है। कारोबार ने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया है। कारोबार बढ़ाते हुए दिल्ली, उत्तराखंड और बरेली तक किसान शहद की सप्लाई कर रहे हैं। बड़ी कंपनियां शहद को अपना ब्रांड बनाकर बेच रहीं हैं। किसानों की आय बढ़ने के बाद लगातार मधुमक्खी पालन करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
गन्ना और गेहूं किसानों की परंपरागत खेती मानी जाती है। इसमें बेहतर आय न होने के चलते किसानों ने दूसरे विकल्प तलाश करना शुरू कर दिए हैं। जिले के करीब 30 से 35 किसानों ने मधुमक्खी पालन का कारोबार करते हुए अपनी आय में इजाफा कर दिया। इसमें कांट और पुवायां के सबसे ज्यादा कृषक शामिल हैं। जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि गिने-चुने किसान ही मधुमक्खी का पालन करते थे। अब इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। शहद की कंपनियों द्वारा स्थानीय पालकों से शहद खरीदकर प्रोसेसिंग के बाद ऊंचे दामों में बिक्री किया जाता है।
लंबा सफर तय करते हैं मधुमक्खी पालक
जिले के मधुमक्खी पालक शहद के लिए लंबा सफर तय करते हैं। वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक जाते हैं, जहां पर मधुमक्खी के लिए फूलों का इंतजाम होता है। बरसात और सर्दी में मधुमक्खी का पालन नहीं कर पाते हैं।
एक बॉक्स से होता है 25 लीटर शहद का उत्पादन
एक किलो शहद तीन से चार सौ रुपये प्रतिकिलो बिकता है। एक बॉक्स में साल में 25 लीटर शहद का उत्पादन आसानी से हो जाता है। इसके जरिये परंपरागत खेती की अपेक्षा मधुमक्खी पालन में अधिक आय हो रही है।
मधुमक्खी के पालन से काफी किसान जुड़ गए हैं। कांट और पुवायां में सबसे ज्यादा किसान मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। शहद ने उनकी जिंदगी बदल दी है। – राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी



