Budaun News: दीपावली आज… तैयारियों में जुटे रहे लोग, नरक चतुर्दशी पर घरों के बाहर जलाए दीये

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद
बदायूं। शनिवार को नरक चतुर्दशी (छाेटी दिवाली) का त्योहार हर्षोल्लास के साथ पारंपरिक तरीके से मनाया गया। लोगों ने शाम को घरों के दरवाजे पर दीये जलाकर रखे और पूजा की। लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों को बिजली की झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया है। बाजार में भी दिवाली से एक दिन पहले खरीदारों की भीड़ उमड़ी। इससे दुकानदारों के चेहरे खिले रहे।
नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी या छोटी दिवाली कहा जाता है। धनतेरस के अगले दिन लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं और दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। कहा जाता है इस दिन से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और उसके बंदीगृह से 16 हजार से ज्यादा महिलाओं को मुक्त कराया था।
वैसे तो दिवाली नजदीक आने के साथ ही घरों की सफाई का काम शुरू हो जाता है लेकिन नरक चतुर्दशी के दिन घर की सफाई और सजावट विशेष रूप से की जाती है। शनिवार को शाम को महिलाओं ने अपने घरों के दरवाजे पर दीया जलाया और माता लक्ष्मी की पूजा की। आज रविवार को दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा।
दीये की रखवाली करते हैं लोग
नरक चतुर्दशी पर घरों के दरवाजे पर रखे जाने वाले दीये के चोरी हो जाने को शुभ नहीं माना जाता है। दरअसल, दिवाली पर जुआ खेलने वाले लोग घरों के दरवाजे से दीये चोरी कर लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि दीया चोरी कर उसकी रोशनी में जुआ खेलने वाली हारता नहीं है। दीये को चोरी होने से बचाने के लिए महिलाएं उसकी तब तक रखवाली करती हैं जब तक वह प्रज्वलित रहता है। इसके बाद खील-खिलौने, मिठाई आदि से पूजा की जाती है।
आज ऐसे करें दिवाली की पूजा
ज्योतिषाचार्य पं. गिरीश शर्मा के अनुसार, दीपावली मनाने के अनेक कारण हैं। इनमें एक मां लक्ष्मी का इस दिन समुद्र मंथन के दौरान प्रकट होना भी है। ये त्योहार प्रकाश से अंधकार की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देते है। मां लक्ष्मी की आराधना कर घर परिवार में सुख समृद्धि और शांति प्राप्त करने का दिन भी है। इस दिन स्नानादि के बाद पवित्र आसन पर बैठकर मुहूर्त अनुसार व्रत, पूजा, अनुष्ठान का संकल्प लें। सुबह और शाम दोनों समय पूजन करें। लक्ष्मी का स्वभाव चंचल है। वह एक जगह लंबे समय तक ठहरती नहीं है लेकिन यदि पूजन स्थिर लग्न में हो तो लक्ष्मी के ठहरने की स्थित बनती है। प्रदोष काल में पूजन का मुहूर्त सुबह 6:32 से 8:56 तक रहेगा। इस दौरान बहीखाता पूजन, कुबेर पूजन, मिष्ठान वितरण आदि करें। स्थिर लग्न शाम 5:28 से 7:23 तक रहेगा। ऐसे में गृहपूजा, दीपदान, महालक्ष्मी-गणेश पूजन आदि कार्य शुभ रहेंगे। निशीथ काल रात 08:56 से रात 11:20 तक रहेगा।
खूब बिकीं झाडू़, खील-खिलौने और मिठाई
नरक चतुर्दशी पर सबसे ज्याद बिक्री झाड़ू की होती है। घर में नरक चतुर्दशी वाले दिन झाड़ू लाना शुभ माना जाता है। आज भी इसे लक्ष्मी स्वरूप मानकर लोग घर लेकर आते हैं। ऐसे में शनिवार को सबसे ज्यादा बिक्री झाड़ू की हुई। सौ रुपये वाली फूल झाड़ू 120 से लेकर 150 रुपये तक की बिकी। खील-खिलौने और मिठाई की दुकानों पर भी खासी भीड़ रही।
पटाखों के बाजार में उमड़ी भीड़, मूर्तियों की भी खरीदारी
दिवाली पर पटाखों की धूम रहती है। इस बार भी पटाखा बाजार दातागंज रोड स्थित मैदान में लगाया गया है। शनिवार को यहां भी खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। पटाखा बाजार में करीब 70 दुकानें लगाई गई हैं जहां जमकर खरीदारी हुई। दुकानदारों के अनुसार, इस बार आवाज वाले पटाखों के स्थान पर रोशनी वाले पटाखों की बिक्री ज्यादा हो रही है। पटाखा विक्रेता राहुल ने बताया कि इस बार आसमान में जाकर राेशनी बिखेरने वाले पटाखों की बिक्री ज्यादा हो रही है। ऊपर जाकर छतरी के आकार में रोशनी बिखेरने वाला पटाखा 450 रुपये का है तो 12 स्टार 320 रुपये में बिक रहा है। दो हजार पटाखों वाली चटाई 800 रुपये की बिक रही है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की भी जमकर खरीदारी हुई।
ड्रोन पटाखा भी किया जा रहा पसंद
– इस बार आतिशबाजी बाजार में ड्रोन पटाखा भी काफी पसंद किया जा रहा है। दो सौ रुपये में मिलने वाली यह पटाखा ड्रोन के आकार है जो ऊपर जाकर ड्रोन के आकार में ही रोशनी करेगा। इसके अलावा 240 साउंड वाला पटाखा 5600 रुपये तथा 120 साउंड वाला तीन हजार का बिक रहा है। इसमें एक बार आग लगाने के बाद यह एक के बाद एक करके आसमान में रोशनी के साथ 120 या 240 आवाज करेगा।
खील-खिलौनों और कंदील की परंपरा को भी निभा रहे लोग
बिना खील-खिलौने और कंदील के दिवाली के त्योहार की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। दिवाली से चार पांच दिन पहले से ही इनकी बिक्री शुरू हो जाती है। शहर से लेकर देहात तक इन्हें बतौर शगुन खरीदा जाता है। रंगीन पारदर्शी पन्नी के कंदील की जगह अब बिजली की लाइट वाले आकर्षक कंदील ने ले ली है।

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद

मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग। संवाद


