

खंडेलवाल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस टेक्नोलॉजी (केसीएमटी) में जैव प्रौद्योगिकी एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक विशेष अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मलेशिया से पधारे श्री के. रामालिंगम, ग्रीन ल्यूब, मलेशिया ने “हरित जैव ईंधन के उत्पादन के लिए अपशिष्ट पदार्थों का सतत स्रोत एवं उपयोग” विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी व्याख्यान दिया।श्री रामालिंगम ने अपशिष्ट पदार्थों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तथा हरित जैव ईंधन के उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि औद्योगिक एवं जैविक अपशिष्ट पदार्थों का उचित तकनीक के माध्यम से उपयोग कर उन्हें उपयोगी ऊर्जा संसाधनों में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ सतत ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने अपशिष्ट से ऊर्जा, जैव ईंधन उत्पादन, सतत स्रोत व्यवस्था तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया तथा अपनी जिज्ञासाओं से संबंधित प्रश्न पूछकर उनका समाधान प्राप्त किया।कार्यक्रम में महाप्रबंध निदेशक डॉ. विनय खंडेलवाल, निदेशक डॉ. अमरेश कुमार, प्राचार्य डॉ. आर.के. सिंह एवं विभागाध्यक्ष डॉ. निशा दिनकर, डॉ. मनोज जोशी सहित जैव प्रौद्योगिकी एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के सभी शिक्षक तथा अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान, शोध-दृष्टि एवं वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को देश-विदेश के विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद करने तथा नवीन वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों को समझने का अवसर मिलता है।कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक रहा। विद्यार्थियों ने मलेशिया से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के अनुभवों एवं वैज्ञानिक जानकारी का लाभ उठाया तथा हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई संभावनाओं को समझा।के0सी0एम0टी0 में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान हरित ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन एवं सतत विकास के प्रति विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।



