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Bareilly News: जन्मजात दोष का मिटा निशान, बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान

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बरेली। बच्चे में जन्मजात दोष का दंश अभिभावकों के लिए असहनीय हो जाता है। ऐसी स्थिति में इलाज के लिए रुपयों की कमी आड़े आती है। उधार लेकर बच्चे का ऑपरेशन कराने की सोच रहे अभिभावकों के लिए स्वास्थ्य विभाग मददगार बना। बीते साल 163 बच्चों का निशुल्क इलाज हुआ। अप्रैल से अब तक और 28 बच्चे ऑपरेशन के लिए चिह्नित किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डिप्टी एसीएमओ डॉ. चंद्रपाल सिंह के मुताबिक बच्चों में कई जन्मजात बीमारियां होती हैं। कुछ को छोड़कर 90 फीसदी से ज्यादा जन्मजात विकृतियों का निशुल्क इलाज स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके योजना के तहत होता है। प्रत्येक जन्मजात बीमारी का इलाज 30 हजार से दो लाख रुपये तक में होता है। इसका खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाता है। बच्चों का इलाज बरेली समेत लखनऊ के राम मनोहर लोहिया, केजीएमयू, अलीगढ़, मुरादाबाद, रामपुर समेत अन्य जिलों के अस्पतालों में कराया जाता है।

पांच लाख बच्चों की स्क्रीनिंग में 180 चिह्नित

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक योजना के तहत 2 से 19 साल तक के पांच लाख से ज्यादा बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य केंद्र पर 92, आशा कार्यकर्ता ने 27 और मोबाइल टीम ने 83 बच्चों को चिह्नित किया। इसमें 180 बच्चों में जन्मजात दोष की पुष्टि हुई। इलाज के बाद 163 बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं।

इन जन्मजात दोषों का होता है निशुल्क इलाज

कॉकलियर इंप्लांट, रीढ़ की हड्डी में फोड़ा एनटीडी, दिल में छेद, ऑर्टिफिशियल लिंब, कैटरैक्ट, हाइपोस्पीडिया, फिस्टुला इन एनस, रिस्क डाईफोर्मिटी, हाइड्रो सिफेलस, डीफ एंड डंब, न्यूरो मोटर इंपियरमेंट, हाइड्रोसील, न्यूरो मोटर डिले, सोशल डिले, हार्मोनल डिसॉर्डर, डिसलोकेट ज्वॉइंट, आई करेक्टिव सर्जरी, विटामिन डी रिकेटस, सैम, टंग टाई, क्लब फुट आदि जन्मजात विकृतियां पांच साल के बच्चों में होती हैं।

वर्जन

अगर किसी बच्चे में जन्मजात विकृति है तो स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर आरबीएसके से संपर्क कर सकते हैं। विशेषज्ञ टीम उसकी जांच करेगी। पुष्टि होने के बाद निशुल्क इलाज कराया जाएगा। – डॉ. चंद्रपाल सिंह, नोडल अधिकारी आरबीएसके


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