Rampur News: ईंट-भट्ठे के तालाब में दो छात्रों के डूबने की आशंका
मिलक (रामपुर)।
नगर के किनारे रेलवे क्रॉसिंग के पास ईंट-भट्ठे के समीप तालाब में दो छात्रों के डूबने की परिजनों ने आशंका जताई। सूचना मिलने पर तहसीलदार और कोतवाल मौके पर पहुंच गए। तालाब के समीप एक पेड़ के नीचे एक छात्र के कपड़े और दोनों की चप्पलें मिलीं हैं। मौके पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। प्रशासन के द्वारा स्थानीय दो मछुआरों को बुलाया गया है।
मोहल्ला बशीर नगर स्थित रेलवे लाइन से सटा ईंट-भट्ठा है। ईंट-भट्ठे के लिए जिस स्थान पर मिट्टी की खुदाई की जाती है, वहां पर तालाब बन गया है। बारिश में उस तालाब में पानी भरा हुआ है। मोहल्ला निवासी सुनील गोस्वामी का 16 वर्षीय पुत्र विशेष कुमार और वीरपाल का 14 वर्षीय पुत्र प्रिंस मंगलवार की दोपहर एक बजे घर से निकले थे। दोनों तालाब पर पहुंचे। उनमें से एक छात्र की टीशर्ट और दोनों की चप्पलें एक पेड़ के नीचे मिलीं। आशंका जताई जा रही है कि दोनों बच्चे नहाने के लिए तालाब में उतर गए। देर शाम छह बजे तक दोनों जब घर नहीं लौटे तो उनके घरवालों को चिंता हुई। परिजन बच्चों को ढूंढते हुए तालाब पर पहुंचे, वहां एक बच्चे के कपड़े और दोनों बच्चों की चप्पलें बबूल के पेड़ के नीचे मिलीं। बाईपास सड़क के पास खेल रहे एक बच्चे ने बताया कि कुछ देर पहले वे नहा रहे थे। परिजन तालाब के दक्षिणी छोर पर पहुंचे। सूचना मिलने पर तहसीलदार राकेश कुमार चंद्रा और कोतवाल अजय पाल सिंह पुलिस फोर्स लेकर पहुंचे। मोहल्ला निवासी वीरपाल ने पुलिस को बताया कि उसका पुत्र 14 वर्षीय प्रिंस कक्षा चार में पढ़ता है। वहीं प्रिंस के पिता सुनील कुमार ने बताया कि उसका 16 वर्षीय पुत्र विशेष कुमार जो कक्षा नौ में पढ़ता है। दोनों साथ घर से एक बजे निकले थे।
मौके पर मौजूद कुछ करने वाले युवक पानी में कूदकर डूबे हुए बच्चों को तलाशने लगे परंतु पानी की गहराई अधिक होने के कारण वह आगे तक नहीं गए। सूचना मिलने पर तहसीलदार राकेश चंद्रा और कोतवाल मौके पर पहुंचे। तहसीलदार राकेश चंद्रा ने बताया कि तालाब में दो बच्चों के डूबने की आशंका जताते हुए सूचना मिली है। दोनों के शव ढूंढने के लिए गोताखोरों को बुलाया जा रहा है। गोताखोरों की मदद से दोनों छात्रों को ढूंढा जाएगा।
बच्चों को ढूंढने में प्रशासन की रही लापरवाही
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी शाम 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक गोताखोर नहीं बुला सके केवल खानापूर्ति के नाम पर स्थानीय दो मछुआरों को बुलाकर उनसे ढूंढ़वाया गया। रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी, जिससे कि बच्चों को आसानी से ढूंढा जा सकता था। शाम 6 बजे से लेकर 9 बजे तक प्रशासनिक अधिकारी यही कहते हुए नजर आए कि गोताखोर आ रहे हैं कुछ देर में पहुंचने वाले हैं। परंतु 9 बजे तक कहीं से कोई गोताखोर नहीं आ पाए। जिससे दोनों छात्रों के परिजनों एवं क्षेत्रवासियों में खासी नाराजगी देखी गई। वहीं दोनों छात्रों के परिजनों ने कहा कि यदि समय से गोताखोरों की व्यवस्था हो जाती तो दोनों बच्चों को आसानी से ढूंढा जा सकता था।