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कभी स्पॉट ब्वॉय थे ऋतिक के नाना, ‘आपकी कसम’ से करियर को दी थी नई उड़ान

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J. Om Prakash Unknown Facts: काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी. वैसे तो डायलॉग यह फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का है और इसका ऋतिक रोशन से कोई कनेक्शन भी नहीं है. इसके बावजूद यह डायलॉग ऋतिक की जिंदगी से जुड़े एक शख्स पर बखूबी लागू होता है. यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि ऋतिक रोशन के नाना जे. ओम प्रकाश थे, जो बेहतरीन कलाकार थे. साथ ही, फिल्मकार के रूप में भी उनका कद काफी ऊंचा था. यूं कह लीजिए कि एक जमाने में जे ओमप्रकाश को फिल्म इंडस्ट्री में कामयाबी का दूसरा नाम कहा जाता था. दरअसल, साल 1974 में आज ही के दिन जे. ओम प्रकाश ने बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया था. ऐसे में हम आपको उनकी जिंदगी के कुछ किस्सों से रूबरू करा रहे हैं.

सियालकोट में हुआ था जन्म

24 जनवरी 1927 के दिन अविभाजित भारत के सियालकोट (अब पाकिस्तान) में जन्मे जे. ओमप्रकाश आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उनके पिता लाहौर के एक स्कूल में शिक्षक थे, जिसके चलते जे. ओमप्रकाश और पढ़ाई-लिखाई का नाता बचपन से ही काफी मजबूत था. जब देश आजाद हुआ तो वह मुंबई आ गए और कुछ कर गुजरने के लिए कमर कस ली. 

ऋतिक रोशन के नाना थे जे. ओमप्रकाश

काफी कम लोग जानते हैं कि ऋतिक रोशन और जे. ओमप्रकाश का आपस में रिश्ता था. दरअसल, जे. ओमप्रकाश रिश्ते में ऋतिक के नाना थे. दोनों की बॉन्डिंग भी काफी अच्छी थी. यही वजह थी कि जब ऋतिक छह साल के थे, तब उन्होंने अपने नाना की फिल्म ‘आशा’ से फिल्मों में कदम रख दिया था. इसके अलावा ऋतिक उनकी फिल्म आसपास और भगवान दादा में भी नजर आए थे. जे. ओमप्रकाश ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनका अंतिम संस्कार ऋतिक ही करेंगे.

सफलता के लिए किया संघर्ष

आज की तारीख में भले ही जे. ओमप्रकाश का नाम काफी नजाकत के साथ लिया जाता है, लेकिन किसी जमाने में ऐसा कतई नहीं था. वह न सिर्फ पहचान के मोहताज थे, बल्कि उन्होंने नाम कमाने के लिए काफी संघर्ष भी करना पड़ा. दरअसल, जे. ओमप्रकाश जब मुंबई आए, तब उन्हें बतौर स्पॉट ब्वॉय भी काम करना पड़ा. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं स्पॉट ब्वॉय के रूप में काम किया. फिल्मों में कई छोटे-मोटे काम किए, लेकिन हमेशा यह देखता रहा कि निर्देशक किसी दृश्य को कैसे फिल्मांकित करते हैं. इससे मैंने काफी कुछ सीखा.’

‘अ’ से शुरू होता था हर फिल्म का नाम

जे. ओमप्रकाश ने बतौर डायरेक्टर ‘आपकी कसम’ फिल्म से डेब्यू किया था. इसके बाद उन्होंने आखिर क्यों? (1985), अपनापन (1977), आशा  (1980), अपना बना लो (1982), अर्पण (1983) और आदमी खिलौना है (1983) आदि फिल्में भी बनाईं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जे. ओमप्रकाश की सभी फिल्मों के नाम ‘अ’ अक्षर से ही शुरू होते थे और वह भगवान भोलेनाथ को काफी ज्यादा मानते थे.

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