Bareilly News: स्कूलों में फर्नीचर न लाइट, सूखी टोंटियां बढ़ा रहीं प्यास
बरेली। एक तो स्कूलों में अव्यवस्था की भरमार है, ऊपर से एक दिन की बारिश ने उनकी तस्वीर ही बदल दी है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने सिठौरा और नेकपुर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। सिठौरा क्षेत्र के स्कूलों में मंगलवार सुबह तक पानी भरा था। ईंटों की पगडंडी से बच्चे आ-जा रहे थे। शिक्षकों ने स्कूलों में लगातार चोरी होने, बच्चों को अब तक किताबें न मिलने जैसी बातें भी साझा कीं। कई स्कूलों के भवन जर्जर हैं तो कर्ह स्कूलों में पानी की व्यवस्था ही नहीं है।
स्कूल-1 (सुबह 11 बजे)
चोरी हो गईं मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट की टोंटियां
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिठौरा में मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट की टोंटियां चोरी हो गई हैं। शिक्षिका नीलम सक्सेना का कहना है कि विद्यालय में आए दिन चोरी होती है। छात्र संख्या भी कम है। शिक्षकों का कहना है कि नए सत्र में प्रवेश के बाद छात्र संख्या बढ़ सकती है। जब से नई संस्था ने मिड-डे मील की सप्लाई शुरू की है, तब से गुणवत्ता पहले की अपेक्षा बेहतर है।
स्कूल-2 (11:09 बजे)
जर्जर इमारत में पीपल की वजह से चटकीं दीवारें
प्राथमिक विद्यालय सिठौरा में एक रात पहले हुई बारिश के चलते पानी भरा था। 1958 में बनी स्कूल की इमारत बेहद जर्जर हालत में है, उसी में बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं। बालक यूरिनल में गेट नहीं है। क्लास में न पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है, न ही फर्नीचर की। बच्चों के पास जूते-मोजे, यूनिफॉर्म आदि बुनियादी चीजें नहीं हैं। नल भी खराब पड़ा है। पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
स्कूल- 3 (11:21 बजे)
एक शिक्षक पर पांचों क्लास की जिम्मेदारी
प्राथमिक विद्यालय सनैया रानी धनसिंह में तैनात एक मात्र शिक्षिका माया देवी का कहना है कि शिक्षक न होने से कई दिक्कतें रहती हैं। एक साथ पांचों क्लास के बच्चों की कक्षाएं लगाई जाती हैं। दो क्लास में बच्चे बैठते हैं, एक में ही वह पढ़ा पाती हैं। कुछ कमरे बंद रहते हैं। बच्चों के पास जूते-मोजे, यूनिफॉर्म आदि भी नहीं हैं। स्कूल में पानी की निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।
स्कूल- 4 (11:38 बजे)
नल से पानी लेकर जाते हैं वॉशरूम
प्राथमिक विद्यालय चीनीमिल नेकपुर की इमारत भी जर्जर है। शौचालय, मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट आदि में पानी की व्यवस्था नहीं है। स्कूल के बाहरी हिस्से में सरकारी नल लगा है, पीने के पानी से लेकर वॉशरूम तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए वही एक मात्र साधन है। फर्नीचर नहीं है। बच्चों के पास जूते-मोजे भी नहीं हैं। कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को किताबें भी नहीं मिली हैं।



