बरेली

Bareilly News: गोल्डन ऑवर दरकिनार, रेफर के खेल में दांव पर मरीजों की जान

Connect News 24

बरेली। दुर्घटना या गंभीर बीमारी के इलाज में शुरुआती एक घंटे को ”गोल्डन ऑवर” माना जाता है। स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के बजाय चल रहे रेफरल के खेल में यह कीमती समय बेकार हो जाता है। इसके चक्कर में कई बार मरीजों की जान चली जाती है। प्रभारियों को स्वास्थ्य केंद्र पर ही मरीजों को प्राथमिक इलाज मुहैया कराने के लिए चेताया जा रहा है पर ठोस कार्रवाई के अभाव में नोटिस बेअसर साबित हो रहे हैं।

जिला अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक अस्पताल में सीएचसी-पीएचसी से रोज 200 से ज्यादा रेफरल केस पहुंचते हैं। जोड़ों के दर्द, पेट दर्द, सामान्य जांच और एक्सीडेंट के बाद मरहम-पट्टी, बच्चों के टीकाकरण से लेकर एंटी रेबीज लगाने के लिए भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जबकि, इनका इलाज स्थानीय स्तर पर हो सकता है। वहीं, महिला संबंधी रोगों के परामर्श के लिए भी गर्भवतियों और बीमार महिलाओं को रेफर कर रहे हैं। लिहाजा, पहले ही मरीजों से भरी ओपीडी में नोकझोंक की नौबत आ रही है।

जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक सीएमओ को पत्र लिखने के बावजूद सीएचसी, पीएचसी से मरीजों के रेफर होने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। यहां मरीज बढ़ने से इलाज के लिए बेड कम पड़ रहे हैं। छह माह में 20 बेड बढ़ चुके हैं।

मेडिकोलीगल से भी कर रहे परहेज

मारपीट में घायल होने वालों को भी जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिन आरोपियों को पुलिस को जेल भेजना होता है, उनका भी मेडिकल परीक्षण सीएचसी-पीएचसी पर नहीं हो पाता। पुलिसकर्मी उन्हें लेकर जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं। दुष्कर्म पीड़िताओं को भी मेडिकोलीगल के लिए महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

सुविधाएं मौजूद फिर क्यों रेफर हो रहे केस

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सभी सीएचसी, पीएचसी पर रेबीज की वैक्सीन उपलब्ध है। प्रभारी चिकित्साधिकारी भी मेडिकल के लिए अर्ह हैं। सीएचसी पर मौजूद महिला चिकित्सक दुष्कर्म के मामलों में मेडिकोलीगल कर सकती हैं। फिर भी मरीजों को रेफर करना केंद्र प्रभारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

एक नजर में

– जिला अस्पताल में हर दिन पहुंच रहे 1,600 मरीज

– सीएचसी-पीएचसी पर रोज 200 मरीजों की ओपीडी

– महिला अस्पताल में रोज होते हैं 10-12 प्रसव

– जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में रोज होती हैं 600 जांचें

– महिला अस्पताल में रोज होती है 300 की ओपीडी

सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों की जांच और इलाज हो रहा है। गंभीर केस ही रेफर होते हैं। मेडिकोलीगल के ज्यादातर केस मुख्यालय के ही होते हैं। केंद्र प्रभारियों, चिकित्सकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. सुदेश कुमारी, प्रभारी सीएमओ


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