Shahjahanpur News: गांव-गांव बुखार … यहां डॉक्टर आधे से भी कम

तिलहर सीएचसी पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद
16 सीएचसी और 39 पीएचसी में 186 के मुकाबले सिर्फ 80 डॉक्टर, व्यवस्था बेपटरी, मरीज परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर उमड़ने वाले मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा। स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है। मानक से आधे डॉक्टर ही इलाज कर रहे हैं। हड्डी रोग, सर्जन आदि के पद भी नाममात्र के भरे हुए हैं। सर्जन, महिला रोग विशेषज्ञ आदि स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने से रोगियों को गांव के नजदीक इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में लोगों का उपचार करने के लिए 39 पीएचसी व 16 सीएचसी का संचालन होता है। इन स्वास्थ्य इकाइयों पर पर्याप्त डॉक्टर नहीं है। 186 के सापेक्ष मात्र 80 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यहां तक कि वायरल बुखार और मलेरिया के मरीजों का उपचार करने के लिए सीएचसी पर कोई फिजिशियन तक नहीं है। ऐसे में फार्मासिस्ट के भरोसे व्यवस्था चल रही है। मरीज देखने से लेकर दवा बांटने तक का काम फार्मासिस्ट कर रहे हैं।
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सीएचसी जरियनपुर में नौ के स्थान पर सिर्फ दो डॉक्टर
मिर्जापुर। ब्लॉक की सीएचसी जरियनपुर में चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों की कमी के चलते बाढ़ क्षेत्र में फैले मलेरिया और डेंगू पर नियंत्रण आसान नहीं है। यहां नौ के स्थान पर दो ही डॉक्टर हैं। सीएचसी में प्रतिदिन 400 से 450 मरीज पहुंच रहे हैं। सीएचसी में डॉ. आदेश रस्तोगी और डॉ. आर्येन्द्र सिंह एलोपैथिक चिकित्सक हैं जबकि डॉ. अलीम और डॉ. शनिष सक्सेना आयुष चिकित्सक हैं। सीएचसी की ओपीडी में दो डॉक्टरों की हर समय जरूरत रहती है। जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी को महीने में कई बार जिला मुख्यालय पर मीटिंग में जाना पड़ता है। सीएचसी पर चिकित्साधीक्षक, एक डॉक्टर एमडी, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, निश्चेतक और तीन एमबीबीएस डॉक्टर होने चाहिए, जो नहीं हैं। संवाद
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विक्रमपुर और परौर पीएचसी पर डॉक्टर नहीं
कलान। पीएचसी पर दो एमबीबीएस डॉक्टर और एक आयुष चिकित्सक तैनात हैं। आयुष डॉक्टर का ट्रांसफर होने के बाद भी अभी रिलीव नहीं किया गया। यहां डॉक्टर मरीजों की भीड़ के चलते परेशान रहते हैं। विक्रमपुर और परौर में कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। यहां दोनों अस्पताल मात्र एक फार्मासिस्ट जगजीवन राम के सहारे चल रहे हैं। मरीज देखने से लेकर दवा बांटने तक का काम फार्मासिस्ट कर रहे हैं। संवाद
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पांच में दो डॉक्टरों के सहारे ओपीडी की जिम्मेदारी
जलालाबाद। मच्छरजनित रोगों के चलते इन दिनों सीएचसी पर सात से आठ सौ मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। पुराने पर्चों को शामिल करने पर करीब एक हजार के आसपास रोजाना मरीज आते हैं। मरीजों के उपचार के लिए यहां पांच डॉक्टर हैं।
इन डॉक्टरों में एक चिकित्साधीक्षक डॉ.अमित यादव शामिल हैं, जिन्हें विभागीय कार्य या बैठक के चलते अधिकतर बाहर रहना पड़ता है। रात के दौरान आकस्मिक चिकित्सा में तैनात रहने वाले डॉक्टर दिन में ड्यूटी नहीं करते, जबकि एक डेंटिस्ट हैं। शेष दो डॉक्टरों पर ओपीडी के अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी है।
डॉ.अनुराग के अनुसार गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। मंगलवार को दोपहर 12 बजे तक 27 बुखार पीड़ित मरीजों ने जांच कराई, जिनमें दो मलेरिया पॉजिटिव निकले। संवाद
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तिलहर सीएचसी में मशीन खराब, खून की जांच बंद
तिलहर। मंगलवार को सीएचसी पर 1066 मरीज पहुंचे, जिसमें सर्वाधिक बुखार और मलेरिया के मरीज थे। सीएचसी पर डॉक्टरों की कमी व खून की जांच की सीबीसी मशीन खराब होने से मरीजों को दिक्कत आई। सीएचसी में डॉ. आसिफ, ऋतुराज, अभिषेक और अंशुमान तिवारी के अलावा प्रभारी डॉ. आलोक अग्रवाल मरीजों को देखते हैं। वैसे यहां पर एक दर्जन से अधिक डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन लंबे समय से आधे डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। लैब टेक्नीशियन शैलेश यादव ने बताया कि मशीन पांच दिन से खराब है। संवाद
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परौर में खंडहर में तब्दील हो रहा अस्पताल
परौर। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार है। चिकित्सालय खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दो नर्स, एक वार्ड बॉय, एक स्वीपर कम चौकीदार व एक वार्ड आया की तैनाती है, लेकिन चिकित्सालय केवल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। रोजाना ओपीडी में आने वाले 60 से 70 मरीजों को फार्मासिस्ट परीक्षण करने के साथ दवाएं भी देते हैं। संवाद
ये हैं डॉक्टर
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र एक-एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ व स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। उनकी ड्यूटी भी जिला मुख्यालय पर रहती है। तिलहर, पुवायां सीएचसी में सर्जन होने से ऑपरेशन की व्यवस्था है। जलालाबाद में ऑपरेशन को शुरू कराने का खाका तैयार किया गया है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों के पद खाली
राजकीय मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, कॉडियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली पड़े हैं। क्लीनिकल के अधिकतर ब्रांच के पद रिक्त हैं। जूनियर डॉक्टरों के सहारे ही जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
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डॉक्टराें की नियुक्ति के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया, साथ ही फोन से भी संपर्क साधा है, जिससे डॉक्टराें की तैनाती हो सकें।
– डॉ.आरके गौतम, सीएमओ

तिलहर सीएचसी पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद

तिलहर सीएचसी पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद

तिलहर सीएचसी पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद

तिलहर सीएचसी पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लगी भीड़। संवाद