यूपी: मंत्री-सांसदों के प्रस्तावों पर रेलवे की गति शून्य, चार साल में सुझावों पर नहीं हुआ अमल

सांकेतिक तस्वीर
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यात्री सुविधाओं से जुड़े प्रस्तावों पर रेलवे के अफसर केंद्रीय मंत्रियों और सत्ताधारी दल के सांसदों की भी नहीं सुनते। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में आने वाली लोकसभा सीटों के 10 सांसदों के सुझाव चार साल में भी फाइलों से बाहर नहीं आ सके। इनमें से कुछेक पर काम शुरू भी हुआ तो उसकी रफ्तार बहुत धीमी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद संतोष गंगवार, वरुण गांधी, हेमा मालिनी, धर्मेंद्र कश्यप से लेकर केंद्रीय सहकारिता और पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री बीएल वर्मा तक के प्रस्तावों को रेलवे के अफसर नजरअंदाज किए बैठे हैं। हाल यह है कि बरेली से आगरा, मथुरा के लिए कोई नियमित ट्रेन नहीं है। यहां से दक्षिण भारत के लिए सीधी ट्रेन की मांग भी वर्षों से पूरी नहीं हो पाई है।
बस बैठकों की खानापूरी
जीएम और डीआरएम सांसदों व उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकों की खानापूरी तक ही सीमित हैं। इस साल भी जून में जीएम चंद्रवीर रमण ने बैठक की थी। इसमें सांसदों ने पुराने प्रस्तावों पर काम न होने का मामला भी उठाया था, तब भी कोई तेजी नहीं दिखी।


