Budaun News: नवरात्र आज से, मैया के स्वागत के लिए सज गए मंदिर और घर-द्वार

दुकान पर नवरात्र की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
बदायूं। शारदीय नवरात्र रविवार से शुरु हो रहे हैं। पूरे नौ दिनों तक देवी मां के भक्त उपवास रखकर उनकी आराधना करेंगे। मंदिरों में दिन भर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा। नगला मंदिर के बाहर शृंगार की दुकानें सज गई हैं। बाजारों में भी पूजा और माता रानी के शृंगार की सामग्री खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ रही।
ज्योतिषाचार्य राजेश शर्मा के अनुसार, नवरात्र शुरू होने के दिन से ही मां अंबे की सवारी तय होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर नवरात्र की शुरुआत रविवार या सोमवार के दिन होती है तो मां हाथी पर सवार होकर आती हैं। वैसे सभी यही जानते हैं कि मां दुर्गा की सवारी शेर है, लेकिन धर्म ग्रंथों के अनुसार देवी दुर्गा के आगमन का वाहन हाथी, घोड़ा, नाव, पालकी भी है। ऐसा माना जाता है कि माता रानी जब हाथी पर सवार होकर आती हैं तो अच्छी वर्षा होती है। खेती के लिहाज के इसे बहुत अच्छा माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हाथी को खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना गया है। ऐसे में उपवास रखकर माता रानी की नौ दिन पूजा करने वाले भक्तों के घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। नवरात्र का समापन शनिवार और मंगलवार के दिन होता है तो मां दुर्गा मुर्गे पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं। इधर, नवरात्र के लिए बिरुआबाड़ी मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, नगला मंदिर आदि में सफाई के साथ विशेष तैयारी की जा रही हैं। नगला मंदिर के पुजारी शिवम शर्मा ने बताया कि मंदिर की सफाई के साथ ही विशेष साज-सज्जा का काम कराया गया है। मंदिर के बाहर भक्तों की सुविधा के लिए नारियल, चुनरी आदि पूजन सामग्री की दुकानें भी लगी हैं।
ऐसे करें माता शैलपुत्री की पूजा
पं. राजेश शर्मा के अनुसार, देवी मां का प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री का है। यह देवी बहुत ही शांतिप्रिय हैं। इनकी पूजा के लिए सुबह उठकर स्नानादि करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद आटे से चौक बनाकर एक चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा तथा कलश की स्थापना करें। इसके बाद मां शैलपुत्री का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। चूंकि मां शैलपुत्री को सफेद रंग प्रिय हैं अत: उन्हें सफेद वस्त्र और सफेद फूल चढ़ाएं। जहां तक संभव हो, भोग के लिए भी सफेद मिठाई का ही उपयोग करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की कथा का श्रवण करें। दुर्गा सप्शती का पाठ करें।
कलश स्थापना का मुहूर्त
इस बार पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर को रात 11.24 मिनट पर शुरू होगी और 15 अक्तूबर को रात्रि 12.34 मिनट पर समाप्त होगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रविवार को पूर्वाह्न 11.44 बजे से दोपहर 12.30 तक रहेगा।
फलों पर चढ़ा महंगाई का रंग
नवरात्र के मद्देनजर शनिवार को शहर के बड़ा बाजार, पुराना बाजार, टिकटगंज, हलवाई बाजार आदि में रौनक रही। कई जगहों पर देवी के शृंगार के सामान की दुकानें लगाई गईं हैं। किराने की दुकानों पर भी व्रत और पूजा का सामान लेने वालों का तांता लगा रहा। नवरात्र की पूर्व संध्या से ही फलों पर भी महंगाई का असर दिखने लगा है। अब तक 80-100 रुपये किलो बिक रहा सेब शनिवार को 120-140 रुपये प्रतिकिलो तक बिका। आम दिनों में 40-50 रुपये प्रतिकिलो मिलने वाला पपीता 80 रुपये प्रतिकिलो बिका। 40 रुपये दर्जन बिक रहा केला शनिवार को 60-70 रुपये बिका।

दुकान पर नवरात्र की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद

दुकान पर नवरात्र की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद

दुकान पर नवरात्र की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद