Budaun News: किराए की डिग्रियों पर चल रहे मेडिकल स्टोर, किसी पर नहीं रहते फार्मासिस्ट

मेडिकल स्टोर। संवाद
बदायूं। जिले के अधिकांश मेडिकल स्टोर बगैर फार्मासिस्ट के ही संचालित किए जा रहे हैं। कई मेडिकल स्टोर तो ऐसे हैं, जिन्होंने अपने यहां फार्मासिस्ट की नियुक्ति तो दिखा रखी है, लेकिन वह कभी मौजूद नहीं मिलते हैं। अप्रशिक्षित लोग ही दवाएं देते हैं। ऐसे में डॉक्टर के पर्चे पर लिखी दवाई मरीज को सही दवा नहीं मिल पाती।
ड्रग अधिनियम के मुताबिक कोई भी मेडिकल स्टोर बगैर फार्मासिस्ट के नहीं चलाया जा सकता। नए लाइसेंस लेने के लिए तो सबसे पहले फार्मासिस्ट होने की जानकारी अनिवार्य रूप से दी जाती है। पर, ड्रग विभाग की अनदेखी के चलते जिले में अधिकांश मेडिकल स्टोर बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे मेडिकल स्टोरो को संख्या देहात क्षेत्र में सबसे अधिक देखने को मिल रही है। देहात क्षेत्र में तो बिना किसी लाइसेंस के भी गांव कूचों में मेडिकल स्टोर संचालित हैं।
दवा देने के लिए फार्मासिस्ट होना जरूरी
मेडिकल स्टोर पर दवा देने वाला फार्मासिस्ट होना जरूरी है, लेकिन जिले में स्थिति इसके विपरीत है। यहां पचास फीसदी संचालक ऐसे हैं जिन्होंने अपनी डिग्री लगाकर लाइसेंस तो ले लिया लेकिन मेडिकल का संचालन कोई अन्य व्यक्ति करता आ रहा है। इसके लिए डिग्री धारक साल में एकमुश्त संचालक से लेने का काम करते आ रहे हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले भर में 2352 मेडिकल स्टोर ऐसे हैं जो विभाग से रजिस्टर्ड हैं। इसमें 642 थोक विक्रेता है वहीं 1710 रिटेल मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। विभाग का दावा यह भी है कि हर मेडिकल पर फार्मासिस्ट ही बैठता है और बैठना भी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यहां कुछ अलग है।
स्थायी ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं
जिले में स्थायी ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं है। यहां बरेली की ड्रग इंस्पेक्टर बविता रानी को प्रभारी ड्रग इंस्पेक्टर बनाया है जो सप्ताह में बृहस्पतिवार और मंगलवार को यहां रहती हैं। शेष पांच दिन जिला रामभरोसे रहता है। कार्रवाई की बात करें तो सितंबर में उझानी के नारायणगंज में फर्जी मेडिकल स्टोर की शिकायत पर ड्रग विभाग ने छापेमारी कर कार्रवाई की थी। इसके बाद कहीं कोई छापेमारी नहीं की जा सकी है।
कोई भी मेडिकल स्टोर बगैर फार्मासिस्ट के नहीं चल सकता। इसके साथ ही अगर कोई मेडिकल स्टोर संचालक एंटी नारकोटिक्स, एंटी टीबी एवं एंटीबायोटिक्स दवाएं, जोकि शेड्यूल एच-1 में आती हैं, बगैर डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन व बगैर खरीद बिक्री के अलग रजिस्टर के बेचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले भी एंटी नारकोटिक्स अभियान के तहत इस तरह की कार्रवाई करते रहे हैं। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। – बबिता रानी, प्रभारी जिला औषधि निरीक्षक


