केसीएमटी कैंपस -2 में किया गया एस. वी. इंटर कॉलेज, बरेली के छात्रों हेतु ‘तुम ही हो विवेकानंद’ नामक कार्यक्रम का आयोजन |
पीo जीo आईo ऑफ़ मैनेजमेंट, केसीएमटी कैंपस -2 में किया गया एस. वी. इंटर कॉलेज, बरेली के छात्रों हेतु ‘तुम ही हो विवेकानंद’ नामक कार्यक्रम का आयोजन |
आज दिनांक 06/01/2024 दिन- शनिवार को प्रेम प्रकाश गुप्ता इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी , केसीएमटी कैंपस -2 के प्रांगण में एस. वी. इंटर कॉलेज के, कक्षा -12 के छात्रों हेतु ‘तुम ही हो विवेकानंद’ नामक कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को कॉलेज तथा भविष्य की चुनौतियों से परिचित करवाना था |

कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा पुष्प अर्पण के साथ किया गया |कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए एस. वी. इंटर कॉलेज, बरेली से आये हुए अध्यापकों का बैज लगाकर महाविद्यालय में स्वागत किया गया तथा महाविद्यालय के डीन डॉक्टर रविजीत सिंह ने अपने भाषण के द्वारा सभी शिक्षकों तथा छात्रों का अपने महाविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया |

तत्पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर प्रवीण रस्तोगी ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए इंटरमीडिएट के छात्रों हेतु एक प्रस्तुतीकरण प्रारंभ किया, जिसमें सर्वप्रथम छात्रों को बताया कि सबसे पहले खुद को जानो , अपने नाम के अर्थ को पहचानो और उसी के अनुसार बनो | डॉक्टर प्रवीण रस्तोगी ने मंच पर कुछ छात्रों को बुलाया तथा एक-एक करके छात्रों ने बताया कि वह जीवन में क्या करना चाहते हैं और क्या बनना चाहते हैं |
प्राचार्य ने बताया कि जीवन में हमें हर आने वाले दिन में अपने आप को बेहतर बनाना चाहिए क्योंकि अगर हम अपने आप को एक सा रखते हैं तो हम समय की धूल में खो जाएंगे |
कुछ छात्रों को दोबारा मंच पर बुलाया गया तथा उनसे अपनी कमियां लिखने को कहा गया, एक-एक करके छात्रों ने अपनी कमियां लिखी तथा उनको बताया और उन्हें दूर करने का प्रण भी लिया |
एक कहानी के द्वारा प्राचार्य महोदय ने बताया कि हमें जीवन में स्वार्थी नहीं बनना चाहिए क्योंकि मेहनत और ईमानदारी का कोई विकल्प नहीं होता है |
इस संसार में हर किसी को किसी न किसी चीज से डर लगता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रकृति ने जो हमें दिया है उसे वापस भी ले लेती है और मानव उसे हमेशा अपने पास रखना चाहता है जो नहीं हो सकता है |

उन्होंने बताया कि हमारा दिल एक उर्वरक जमीन की तरह होता है और जो भी विचार हम होते हैं वह दिल की शक्ति पाकर वैसा ही पैदा होता है | इसीलिए हमें अपने दिल की जमीन में अच्छे विचार रखने चाहिए |
हमें कल्पना की दुनिया में जीने के स्थान पर वर्तमान में जीना चाहिए क्योंकि हम जो भी कुछ कर सकते हैं वह केवल वर्तमान में कर सकते हैं, ना तो भूत में और ना ही भविष्य में कुछ बदलाव कर सकते हैं |
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य ने एस. वी. इंटर कॉलेज से आए हुए सभी अध्यापकों को एक- एक स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया तथा विजयी छात्रों को भी मेडल पहनाकर उन्हें उत्साहवर्धित किया |
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे |




