Rampur : फैसला सुनते ही भावुक हुए आजम खां, जज के सामने बयां किया दर्द, बोले- आज मुझे इंसाफ मिला

कचहरी से जाते आजम खां…
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नफरती भाषण देने के दोष से मुक्त होने का फैसला सुनने के बाद आजम खां भावुक हो गए। कोर्ट रूम में ही उन्होंने पीठ को संबोधित करते हुए कहा कि फैसला मेरे खिलाफ जाता तो मुझे दुख नहीं होता, लेकिन आज फैसला मेरे पक्ष में आया है और मुझे इंसाफ मिला है।
इस मामले में जब 27 अक्तूबर 2022 को एमपी-एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल ने अपना फैसला सुनाया था तो उस वक्त आजम खां ने कहा था कि मै आपके इंसाफ का कायल हो गया हूं। यह अधिकतम सजा थी। जमानत मिलती है उसी बिना पर जमानत पर हूं, पर इंसाफ का कायल हूं। अकेला जेल काटकर आया हूं। पांच छह माह कोरोना में रहा। डेढ़ महीने में कई ऑपरेशन हुए। हिम्मत नहीं हारा हूं और अभी दरवाजे बंद नहीं हुए। लड़ाई जारी रहेगी। कानूनी रास्ते खुले हैं।
लेकिन बुधवार के दिन आजम खां निचली अदालत के फैसले के बाद भावुक हो गए और उन्होंने न्यायाधीश से अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि मुझे अदालत से इंसाफ मिला है। आजम खां कोर्ट रूम में दोपहर 12 बजे अपने दोनों बेटों के साथ दाखिल हुए। कोर्ट ने फैसला पढ़कर सुनाया जिसको आजम खां, उनके बड़े बेटे अदीब आजम और अब्दुल्ला आजम ने सुना। आजम खां ने कोर्ट के फैसले पर अपने हस्ताक्षर किए। करीब 20 मिनट रुकने के बाद वह अपने समर्थकों और सपा नेताओं के साथ चले गए।
पीएम मोदी और सीएम योगी के खिलाफ की थी टिप्पणी
2019 के लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट से सपा-बसपा गठबंधन उम्मीदवार आजम ने सात अप्रैल 2019 को खाता नगरिया गांव में जनसभा की थी। आरोप है कि आजम खां ने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ और तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह को लेकर टिप्पणी की थी जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी अनिल चौहान ने मिलक कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप पत्र दाखिल किया था।
कब-क्या हुआ…
- 7 अप्रैल 2019 को आजम खां ने खातानगरिया गांव में जनसभा की। उसमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ टिप्पणी की। जिसका वीडियो वायरल हुआ था। उसके बाद वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी अनिल कुमार चौहान ने थाना मिलक में मुकदमा दर्ज कराया।
- 9 अप्रैल 2019 को मुकदमा दर्ज हुआ
- 17 मार्च 2020 को पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लिया।
- 12 नंबवर 2021को आजम खां पर आरोप तय
इन धाराओं में दर्ज हुए मुकदमें
- धारा 153-ए आईपीसी यानी धार्मिक भावनाएं भड़काना
- धारा 505-ए आईपीसी यानी समुदायों में शत्रुता, घृणा पैदा करने के लिए गलत बयानी
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 चुनाव के लिए समुदायों में शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए भाषण देना।
- 27 अक्टूबर 2022 को एमपी-एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल में आजम खां को दोषी करार देते हुए तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई।
- 9 नवंबर 2022 को आजम खां ने जिला जज की कोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी।उसके बाद कोर्ट ने उनकी अपील को एमपी-एमएलए कोर्ट सेशन ट्रायल में स्थानांतरित कर दिया।
- 11 मई 2023 को दोनों पक्षों की बहस पूरी-24 मई 2023 को निचली अदालत का फैसला निरस्त करते हुए आजम खां को बाइज्जत बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आजम खां ने जुर्माने की धनारशि जो कोर्ट में जमा की है वह उसे प्राप्त करने के हकदार हैं।
66 पेज में आया कोर्ट का फैसला
कोर्ट का फैसला 66 पेज का है जिसमें निचली अदालत के अभियोजन और बचाव पक्ष के द्वारा पेश किए गए गवाहों के बयानों का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट की नजीर और आजम खां और अभियोजन की दलीलों का उल्लेख किया गया है। जबकि निचली अदालत का फैसला 32 पेज का था। जिसमें सभी गवाहों के बयान पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और सीडी का उल्लेख किया गया है।
सपा नेता आजम खां पर 90 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं
सपा नेता आजम खां पर 90 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। जिनका ट्रायल कोर्ट में चल रहा है। 27 महीने तक सीतापुर की जेल में रहने के बाद मई माह में जमानत पर आजम खां बाहर आए थे। उन्होंने 26 फरवरी 2020 को रामपुर की कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था जिसमें उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. तंजीम फात्मा और अब्दुल्ला आजम भी जेल गए थे। वर्तमान में तीनों जमानत पर चल रहे हैं।
उनके खिलाफ आलियागंज के किसानों ने जमीन कब्जाने के आरोप में 26 यतीमखाना प्रकरण में 12 डूंगरपुर में 12 और आचार संहिता उल्लंघन सहित अन्य मामलों में मुकदमें दर्ज हैं। जिनके ट्रायल कोर्ट में चल रहा है। अभी तक एक मामले में कोर्ट का फैसला आया है। 27 अक्तूबर को आजम खां को निचली अदालत ने तीन वर्ष की सजा और छह हजार रुपये जुर्माना डाला था। 24 मई को यानी बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट सेशन ट्रायल में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए आजम खां को बरी कर दिया है।