Bareilly News: दूसरे दिन भी जाम रहा शहर, आज से राहत के आसार
बरेली। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) के दौरान दूसरे दिन रविवार को भी पूरा शहर जाम के हवाले रहा। आने-जाने वाली बसें और ट्रेनें यात्रियों से ठसाठस रहीं। दूसरी पाली की परीक्षा छूटने के बाद जंक्शन की टिकट खिड़की पर लंबी कतार दिखी। सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर बसें न मिलने के कारण कई रूटों के अभ्यर्थी परेशान रहे। सबसे ज्यादा समस्या शाहजहांपुर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ की ओर जाने वाले यात्रियों को हुई। सोमवार से स्थित में सुधार की उम्मीद है।
शहर के 37 केंद्रों पर रविवार को भी 13 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। मुरादाबाद, बरेली, हरदोई के अभ्यर्थियों का भी यहां केंद्र बनाया गया था। इस वजह से इन रूटों की बसों और ट्रेनों पर दबाव ज्यादा रहा। दोपहर 12 बजे पहली पाली की परीक्षा छूटने के बाद शहर में कई स्थानों पर भीषण जाम लग गया। हालांकि, प्रमुख चौराहों पर रविवार को भी अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गई थी। इसके बाद भी श्यामगंज, बरेली कॉलेज, नावल्टी चौराहा, ईसाइयों की पुलिया, मालियों की पुलिया, पीलीभीत बाइपास आदि प्रमुख स्थानों पर दोपहर से लेकर देर शाम तक कई बार जाम लगा। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एक ओर ट्रैफिक जाम, दूसरी ओर सड़क पर संडे बाजार
सबसे ज्यादा समस्या श्यामगंज से सेटेलाइट के बीच हुई। यहां मालियों की पुलिया पर कई दिन से खराब ट्रैफिक लाइटों को अब तक ठीक नहीं कराए जाने से रोजाना जाम लग रहा है। रविवार को मालियों की पुलिया से ईसाइयों की पुलिया के बीच रोड के एक ओर संडे बाजार ने यातायात जाम कर दिया। दूसरी ओर परीक्षा देकर लौटने वाले अभ्यर्थियों से भरे ऑटो और ई-रिक्शा का दबाव रहा। इसके चलते यहां कई बार भीषण जाम की स्थिति बनी।
ऑटो वालों ने वसूला मनमाना किराया
परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों को जंक्शन व बस अड्डों से केंद्रों तक पहुंचाने व केंद्रों से वापस लाने के लिए ऑटो चालकों ने मनमाना किराया वसूल किया। आमदिनों में जहां का किराया 15-20 रुपये है, अभ्यर्थियों से 50 रुपये तक वसूल किए गए।
जोखिम में डाली जान
रविवार को भी ट्रेनों में सवार होने को लेकर अभ्यर्थियों में हड़बड़ी दिखी। आपाधापी में जान की परवाह किए बिना ही किसी तरह ट्रेन में सवार हुए। कुछ ने गैलरी व शौचालय में बैठकर यात्रा की तो कई अभ्यर्थियों को गेट पर ही लटककर यात्रा करनी पड़ी।



