रामपुर

Birthday Special: पहले तो ये बताओ कि रामपुर में मुझे कौन नहीं जानता… दो नवाबों के उस्ताद रहे थे मिर्जा गालिब

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Birthday special Mirza Ghalib was the teacher of two Nawabs of Rampur

Mirza Ghalib Birthday special
– फोटो : अमर उजाला

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पूछते हैं वो कि ”गालिब” कौन है, कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या, जैसे शेर लिखने वाले दुनिया के मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने रामपुर के बारे में अपने एक मित्र को 1860 में लिखे खत में लिखा था कि ‘पहले तो ये बताओ कि रामपुर में मुझे कौन नहीं जानता। इस खत से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि गालिब का रामपुर से कितना गहरा रिश्ता था।

मिर्जा गालिब रामपुर के दो शासकों के उस्ताद रहे। रजा लाइब्रेरी में उनसे जुड़ी यादों का संग्रह आज भी सुरक्षित है। उन्हें रामपुर रियासत से प्रतिमाह सौ रुपये वजीफा मिलता था। रामपुर में ही उन्होंने जिंदगी के कई बरस गुजारे। यहां की आबोहवा से भी उन्हें बेइंतहा मोहब्बत थी। अपने मित्र को लिखे एक खत में उन्होंने रामपुर की आबोहवा का जिक्र करते यहीं बस जाने की ख्वाहिश जाहिर की थी।

27 दिसंबर 1797 को आगरा में पैदा हुए मिर्जा असद उल्ला बेग खां गालिब का रामपुर रियासत से गहरा नाता रहा है। रामपुर रजा लाइब्रेरी में उनके संस्मरण हैं। 1857 के बाद मिर्जा गालिब रामपुर पहुंचे। इतिहासकारों के अनुसार उन्होंने 1860 में रामपुर के शासक नवाब यूसुफ अली खां के उस्ताद रहे। इसके बाद नवाब कल्बे अली खां के भी शिक्षक रहे। उन्हें राजद्वारा में एक मकान भी रहने को दिया गया था।

कई बार रामपुर आने पर वह शाही महल खासबाग के मेहमान भी बने। इतिहासकारों के अनुसार रजा लाइब्रेरी में संग्रहित दस्तावेज यह बताते हैं कि वह कुछ साल बाद दिल्ली चले गए, लेकिन रामपुर के नवाबों से खत के जरिए संपर्क में लगातार बने रहे। उनके लगभग 150 खत अभी भी मौजूद हैं। 

 


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