बदायूं

Budaun News: भाजपा की राह अब होगी मुश्किल, पुरानी प्रतिद्वंद्वी सामने

Connect News 24

पूर्व पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा के नामांकन के बाद मुकाबला होगा रोचक

2017 में दीपमाला ने फात्मा को हराया

2015 फात्मा ने दीपाला को दी थी शिकस्त

पिछले चुनाव में कम था हार-जीत का अंतर

सौरभ सक्सेना

बदायूं। सपा के सिंबल न देने के बाद भाजपा को जो राह आसान लग रही थी, उसमें अब ब्रेक लग गया है। कोई सशक्त प्रत्याशी सामने न आने तक भाजपाइयों को पूरा भरोसा था कि सीट पर उनके मुकाबले कोई नहीं है। पूर्व पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा के मैदान में आने से अब समीकरण बदल गए हैं। ऐसे में अब तक जीत के लिए आसान मानी जाने वाली बदायूं सीट पर भाजपा की चुनौती बढ़ गई है।

सपा द्वारा सिंबल न दिए जाने पर पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं फात्मा रजा ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे लेकिन नामांकन के आखिरी दिन उन्होंने अपना पर्चा दाखिल करके सबको चौंका दिया। इसके बाद जीत को आसान मानने वाले भाजपाइयों को भी राह कठिन दिखाई देने लगी।

पिछले चुनाव पर गौर करें तो भाजपा की दीपमाला गोयल 32316 वोट पाकर जीती थीं। सपा की फात्मा रजा केवल 3176 वोटों से हारी थीं। उन्हें 29140 वोट मिले थे। इससे पहले साल 2015 में हुए चुनाव में सपा की फात्मा रजा ने दीपमाला को शिकस्त देकर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया था। सपा ने कुछ ही दिन पहले फात्मा रजा के पति पूर्व विधायक आबिद रजा को आंवला और धौरहरा लोकसभा सीट का प्रभारी बनाया था। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि सपा फात्मा रजा को निकाय चुनाव में प्रत्याशी बना सकती है, लेकिन सिंबल न देकर सपा ने समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। नामांकन के आखिरी दिन जब फात्मा रजा ने अचानक नामांकन करा दिया तो उनके समर्थकों में भी जोश भर गया। साथ ही जो भाजपा इस चुनाव को एकतरफा मान रही थी, उसे भी राह कठिन लगने लगी। हालांकि जीत- हार का फैसला तो बाद में होगा, लेकिन इतना जरूर है कि अब भाजपा की राह आसान नहीं होगी।

इनसेट

निर्दलीय भी जीतने के लिए कर रहे मशक्कत, कांग्रेस व बसपा भी दौड़ में

निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फात्मा रजा के अलावा शहर सीट से सपा नेता फखरे अहमद शोबी की पत्नी फायजा नकबी, इंदू सक्सेना, आफताब, आशा, अजरा अल्वी, नाजिया खान व नाजमी ने भी नामांकन कराया है। इसके अलावा कांग्रेस से माधवी साहू, बसपा से संतोष कश्यप व आम आदमी पार्टी से शाह जमानी भी मैदान में हैं। हांलाकि असल संख्या तो नाम वापसी के बाद पता चलेगी लेकिन इतना जरूर है कि कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों समेत पार्टियों से जुड़े प्रत्याशी भी जीत के लिए तमाम जोर लगा रहे हैं।

जिलाध्यक्ष ने फेसबुक पर किया प्रचार…कमेंट्स की पड़ी ‘मार’ – बृहस्पतिवार को फेसबुक पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने फेसबुक पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में जो लिखा उसकी काफी चर्चा रही। लोगों ने तरह तरह के कमेंट इस पर करने शुरू कर दिये। जिलाध्यक्ष ने लिखा है कि ‘निकाय चुनाव में हर प्रत्याशी योगी जी ही है, याद रखना। प्रत्याशी नहीं कमल देखना’। जैसे ही ये पोस्ट पड़ी, उस पर कमेंट पड़ने शुरू हो गए। कई इसके पक्ष में तो अधिकांश विपक्ष में नजर आए। कई लोगों ने तो भाजपा प्रत्याशी का खुला विरोध ही करना शुरू कर दिया तो कई ने पिछले पांच सालों में शहर की दुर्गति पर भाषण दे डाला।

ये रहा अब तक के पालिकाध्यक्षों का कार्यकाल-

– खान बहादुर नवाब अब्दुल गफ्फार- 1908 से 1922

– मौलवी जहूर हसन हमीदी- 1922 से 1924

– खान बहादुर मौलवी हाजी वहीद बख्श- 1924 से 1928

– मौलवी अबुल हसन कादरी- 1928 से 1931

– खान बहादुर मौलवी वहीद बख्श कादरी- 1932

– खान बहादुर मौलवी हाजी वहीद बख्श कादरी- 1933 से 1935

– मौलवी कौसर हुसैन- 1936 से 1940

– मौलवी अली मकसूद हमीदी- 1940 से 1941

– मौलवी अली मकसूद हमीदी- 1941 से 1944

– खान बहादुर मौलवी रहमान बख्श कादरी- 1956 से 1957

– मौलवी अली मकसूद हमीदी- 1957 से 1959

– शब्बीर हसन खां- 1959 से 1964

– शब्बीर हसन खां 1965 से 1967

– शब्बीर हसन खां- 1969 से 1972

– शब्बीर हसन खां- 1974 से 1977

– शब्बीर हसन खां- 1988 से 1991

– ओमप्रकाश मथुरिया- 1991 से 1993

– जोगेंद्र सिंह अनेजा- 1993 से 1994

– ओमप्रकाश मथुरिया- 1995 से 2000

– रब्बन सैफी- 2000 से 2005

– आबिद रजा- 2006 से 2011

– ओमप्रकाश मथुरिया- 2012 से 2015

– अशोक कुमार श्रीवास्तव- प्रशासक

– फात्मा रजा- 2015 से 2017

– निशा मिश्रा- प्रशासक

– दीपमाला गोयल- 2017 से 2022


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button