Budaun News: पहली बार जिले में खोजे जाएंगे फाइलेरिया के मरीज
बदायूं। स्वास्थ्य महकमा जिले में पहली बार फाइलेरिया के मरीजों को खोजेगा। हर ब्लाॅक के दो गांवों से तीन-तीन सौ सैंपल लिए जाएंगे। आगामी 25 अक्तूबर से यह सर्वे शुरू कर दिया जाएगा।
डेंगू व मलेरिया के साथ ही फाइलेरिया भी मच्छर जनित बीमारी है। फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी से बनारस की तरफ अधिक मरीज मिलते हैं लेकिन आसपास के जिलों में फाइलेरिया के मरीज मिलने के बाद शासन ने जिले में भी इसका सर्वे कराने के लिए मलेरिया विभाग को निर्देश दिए हैं। इसके लिए 15 ब्लॉकों के 15 चिह्नित और 15 बिना चिह्नित यानी कुल 30 गांवों का सर्वे किया जाएगा। यही व्यवस्था शहरी क्षेत्र से जुड़े दो गावों में रहेगी। इस तरह इन 32 गांवों से कुल 9600 सैंपल लिए जाएंगे। बुधवार से शुरू होने वाले सर्वे और सैंपलिंग के काम के लिए हर ब्लॉक के लिए एक एलटी (लैब टेक्नीशियन), एक आशा, एक सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) और एक एएनएम लगाए जाएंगे। इस प्रकार एक टीम में चार लोग शामिल रहेंगे।
रात आठ बजे के बाद सक्रिय होता है वायरस : क्यूलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति का मच्छर एक धागे समान परजीवी को छोड़ता है जो व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे मरीज बना देता है क्योंकि फाइलेरिया का वायरस रात में सक्रिय होता है। इस कारण यह सर्वे रात में किया जाएगा। रात आठ बजे से टीम सैंपल लेना शुरू करेगी जिस गांव में सर्वे होना होगा उस गांव की आशा और प्रधान जनता को दिन में जानकारी देंगे ताकि रात में टीम को परेशानी न उठानी पड़े।
ये हैं लक्षण: फाइलेरिया से संक्रमित होने के बाद बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आसपास दर्द और सूजन की समस्या होती है। पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसील (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। इस बीमारी में पैरों में सूजन हाेने के कारण हाथी के पांव जैसे हो जाते हैं, इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव भी कहा जाता है।
जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने बताया कि शासन के निर्देश पर पहली बार फाइलेरिया के मरीजों का सर्वे जिले में शुरू हो रहा है। जांच के बाद ही सामने आएगा कि जिले में फाइलेरिया का मरीज है या नहीं।