Budaun News: सियासी उठापटक की भेंट चढ़ गया स्कूल का रास्ता

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।
– खेतों से होकर निकलती हैं राजकीय कन्या इंटर कॉलेज सैदपुर की छात्राएं
– लोग बोले- दो नगर पंचायत अध्यक्षों की आपसी लड़ाई के कारण नहीं हो पा रहा निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं / सैदपुर। बेटियों की शिक्षा के लिए सरकार ने नगर में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की स्थापना तो कर दी, लेकिन अब तक यहां तक पहुंचने का रास्ता नहीं बन पाया। दो नगर पंचायत अध्यक्षों की राजनीति के अखाड़े में ये रास्ता चित हो गया। छात्राएं व काॅलेज का स्टाफ आज भी एक पगडंडी के सहारे कॉलेज आता-जाता है। यह पगडंडी भी एक खेत से होकर अभी करीब एक माह पहले बनाई गई है।
सपा सरकार ने वर्ष 2014 में गरीब बेटियों की शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के उद्देश्य से मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत करीब साढ़े आठ करोड़ की लागत से राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण करवाया था, लेकिन 10 वर्ष बीतने के बाद भी यहां के हालात पर कोई फर्क नही पड़ा। सबसे बड़ी दिक्कत कॉलेज पहुंचने के लिए रास्ते की है, जो आज तक नहीं बन सका है।
छात्राएं खेतों में कीचड़ के बीच से होकर कॉलेज आती-जाती हैं। करीब डेढ़ माह पूर्व नगर पंचायत की ओर से खेत में मिट्टी डलवाकर एक पगडंडीनुमा रास्ता जरूर बनवा दिया गया। लोगों के अनुसार, कॉलेज निर्माण के समय इसके संपर्क मार्ग को तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष इशरत अली खान ने बनवाना चाहा तो पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष आयशा विकार के पति विकार अहमद ने इसका विरोध किया।
इसके बाद जब आयशा विकार अध्यक्ष बनीं तो नगर पंचायत अध्यक्ष इशरत अली खान उनका विरोध करने लगे। हालांकि दोनों नगर पंचायत अध्यक्ष एक दूसरे का विरोध करने की बात को नकार रहे हैं। ऐसे में रास्ते की राजनीति छात्राओं और स्टाफ को भारी पड़ रही है। मौजूदा अध्यक्ष इशरत अली खान ने रास्ते पर मिट्टी बेशक डलवा दी है, लेकिन बारिश होने पर कीचड़ और पानी से रास्ता लबरेज हो जाता है। ऐसे में बारिश के मौसम में छात्राएं मजबूरन कॉलेज आना ही छोड़ देती हैं।
और भी अव्यवस्थाएं, पर किसी का ध्यान नहीं
अव्यवस्थाओं की वजह से महिला शिक्षक यहां आने को तैयार नहीं होतीं क्योंकि कॉलेज में आज तक पानी, शौचालय, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। स्थिति इतनी खराब है कि गृह, रसायन और जीव विज्ञान की प्रयोगशाला में रखरखाव के अभाव में सारे उपकरण खराब हो चुके हैं। सफाई कर्मी की तैनाती न होने की वजह से महिला शिक्षकों को स्वयं ही कॉलेज की सफाई करानी पड़ती है। ऐसे में छात्रावास और कॉलेज परिसर में बड़ी बड़ी घास उग आई है, साथ ही कॉलेज के पास तालाब होने से सांप व कीड़े-मकौड़े निकलते रहते हैं। कॉलेज के प्रारंभ में जहां यहां 500 छात्राएं थीं, वही अब यह संख्या 110 ही रह गई है। कॉलेज में प्रधानाचार्य सहित दो लेक्चरर और तीन सहायक स्टाफ की नियुक्ति है, जबकि मानक के अनुसार 10 लेक्चरर, एक प्रधानाचार्य और तीन सहायक स्टाफ होना चाहिए।
रास्ते के संबंध में विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखा गया है। डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार ने एक सप्ताह पूर्व कॉलेज का निरीक्षण किया था, उन्हें भी रास्ते की समस्या से अवगत कराया गया। समस्या के शीघ्र समाधान का उन्होंने आश्वासन दिया है।
-सानिया उवैस, कार्यवाहक प्रधानाचार्य
कॉलेज के मार्ग का निर्माण होना चाहिए। हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। यह बेटियों के भविष्य का सवाल है। हालांकि सरकारी तालाब पर रास्ते का निर्माण नहीं होना चाहिए।
– विकार अहमद खान, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष के पति
-इशरत अली खान, नगर पंचायत अध्यक्ष

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।

सैदपुर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थित तालाब।