शाहजहाँपुर

कोलाघाट पुल : मरम्मत पर फूंके करोड़ों…दो साल बाद पता चला डिजाइन ही खराब थी

Connect News 24

Kolaghat Bridge: Crores spent on repairs...after two years it was found that the design itself was bad

कोलाघाट पुल

शाहजहांपुर। कोलाघाट पुल गिरने के बाद आई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि खराब डिजाइन के कारण इस पर यातायात शुरुआत से ही खतरनाक था। इस पुल को एक न एक दिन गिरना ही था लेकिन हादसे से पहले किसी को इसका अंदाजा तक नहीं लग सका। खराब डिजाइन के पुल की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये फूंक दिए गए। अब 148 करोड़ रुपये से नया पुल बनाने की तैयारी है।

2009 में सेतु निगम ने पुल बनाने के बाद पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया था। कोलाघाट पुल के बनने के कुछ समय बाद ही इसमें दिक्कतें आनी शुरू हो गई थी। शुरुआत में छोटी-मोटी दिक्कत आने पर लोक निर्माण विभाग इसकी मरम्मत करा देता था। समय गुजरने के साथ पुल के पिलर कमजोर पड़ते गए। अक्सर पुल से यातायात बंद कर मरम्मत का कार्य कराया जाता था। लोक निर्माण विभाग हर साल मानसून से पहले पूरे पुल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करता था। पुल गिरने से दो साल पहले से ही सड़क उखड़ने या सरिया निकलने की दिक्कत आ रही थी। नवंबर 2021 में पुल गिरा था लेकिन अक्तूबर में पिलर नंबर सात की बेयरिंग क्षतिग्रस्त हो गई थी। पीडब्ल्यूडी ने पिलर नंबर सात की बेयरिंग को बदल दिया था। इसमें 20 दिन में चार-पांच लाख रुपये खर्च हुए थे। वहीं जो बेयरिंग 20-25 साल तक खराब नहीं होती वह महज 12 साल में ही खराब हो जाने पर इंजीनियरों को शक हुआ था लेकिन भारी वाहनों के आवागमन के कारण ऐसा होना स्वीकार कर लिया। बाद में फिर से बेयरिंग महज एक महीने में ही खराब हो गई। तब इंजीनियरिंग एक्सपर्ट को यकीन हो गया था कि इसमें कोई बड़ी खराबी है। इसकी जानकारी जब प्रशासन के पास पहुंची तो सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी की टीम बनाकर जांच के लिए भेजी थी। टीम को 29 नवंबर को जांच के लिए जाना था लेकिन उसी दिन हादसा हो गया था। हालांकि पुल की खराबी से मिल रहे संकेतों के बावजूद इतने अरसे तक डिजाइन की खराबी का अंदाजा न लगा पाना इंजीनियरिंग विभाग की विफलता ही माना जा रहा है।

जांच में सभी वेल मिले थे खराब

कमजोर बुनियाद पर ही करीब पौने दो किमी लंबा पुल बना दिया गया था। इसके कुएं (वेल) न सिर्फ झुके हुए मिले, बल्कि निर्धारित स्थान से हटे हुए थे। यह जांच केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) से कराई गई थी। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई थी। कोलाघाट पुल में कुल 59 वेल बनाए गए थे। इनमें से 15 की जांच सीआरआरआई ने की। उसने रिपोर्ट में कहा है कि अधिकांश वेल की बुनियाद (फाउंडेशन) निर्धारित मानक से ज्यादा झुकी और अपने स्थान से हटी हुई मिली। निर्माण के दौरान इस समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन 15 वेल की जांच की, उनमें से कोई भी उतना भार सहन करने के योग्य नहीं मिला, जितने के लिए वे डिजाइन किए गए। कुओं की फाउंडेशन पानी के क्षैतिज दबाव को सहन करने के लिहाज से असुरक्षित मिली। इसे इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड के विपरीत बताया गया था। रिपोर्ट में सभी वेल को मजबूत किए जाने की आवश्यकता बताई गई थी।

गिरने के बाद मरम्मत में 6.25 करोड़ रुपये फूंके

जिस पुल को महज 43 करोड़ रुपये में बना दिया गया था, उसके अनुरक्षण और मरम्मत में फिर से करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। पुल गिरने से मिर्जापुर-कलान के लाखों लोगों का संपर्क मुख्यालय से कट गया था। जल्द आवागमन शुरू करने के लिए बगैर जांच रिपोर्ट का इंतजार किए 6.24 करोड़ रुपये की लागत से सितंबर-अक्तूबर 2022 में पुल की मरम्मत करा दी गई। जनता के दबाव में जब पुल से यातायात शुरू कराने की बारी आई तो अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। विशेषज्ञों का मानना था कि पुल से चारपहिया तो दूर दोपहिया वाहनों का चलना भी खतरनाक है। फिलहाल पुल से दो पहिया वाहनों को निकलने की अनुमति दी गई है।


कोलाघाट पुल का सफर

– 90 के दशक में कोलाघाट पुल को लेकर जन आंदोलन शुरू हुआ था।

-1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पुल का शिलान्यास किया था।

-2002 में पुल को मंजूरी मिली थी।

-2005-06 में 11 करोड़ की लागत पुल का निर्माण शुरू किया गया।

-2008 में बसपा शासनकाल में 42.47 करोड़ रुपये में पुल और अप्रोच रोड का निर्माण पूरा हुआ।

– 2009 में पुल आवागमन के लिए खोला गया।

-60 पिलर पर तैयार किया गया है 18 सौ मीटर लंबा पुल।

-29 नवंबर 2021 को सात नंबर पिलर जमीन पर धंसने से पुल का दो सौ मीटर हिस्सा गिर गया।

जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है। नए पुल के निर्माण के लिए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है।

वीके मौर्य, डीपीएम, सेतु निगम


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