केसीएमटी कैंपस -2 , में किया गया मंडल स्तरीय प्रधानाचार्य सम्मेलन ‘सेतु’ का आयोजन”।
पीoजीoआईo ऑफ़ मैनेजमेंट में किया गया मंडल स्तरीय प्रधानाचार्य सम्मेलन 'सेतु' का आयोजन"।

दिनांक 02/12/2023 दिन- शनिवार को प्रेम प्रकाश गुप्ता इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी , केसीएमटी कैंपस -2 के प्रांगण में मंडल स्तरीय प्रधानाचार्य सम्मेलन S.E.T.U. ( Secondary Education to University ) का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फरीदपुर क्षेत्र के एम.एल. सी . माननीय श्री कुंवर महाराज सिंह जी, मुख्य वक्ता डॉ पूर्णिमा अनिल , महाविद्यालय के एम.डी. डॉ विनय खंडेलवाल,विष्णु इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शरदकांत शर्मा, तिलक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ हरिओम मिश्रा, एस. वी. इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ संदीप इंदवर तथा खुदागंज, तिलहर, बीसलपुर, कटरा, शाहजहाँपुर, फरीदपुर एवं बरेली क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के 60 से अधिक प्रधानाचार्य उपस्थित रहे |कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा पुष्प अर्पण के साथ किया गया |

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉक्टर प्रवीण रस्तोगी जी ने अपनी मधुर वाणी से सभागार में पधारे सभी बुद्धिजीवों का स्वागत किया | महाविद्यालय के एमडी डॉक्टर विनय खंडेलवाल ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुँवर महाराज सिंह जी को पौधा देकर एवं बैज लगाकर स्वागत किया तथा कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉक्टर पूर्णिमा अनिल का भी स्वागत बैज लगाकर एवं पौधा देकर किया गया | कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टर हरिओम मिश्रा, प्रधानाचार्य तिलक इंटर कॉलेज, शरदकांत शर्मा प्रधानाचार्य विष्णु इंटर कॉलेज तथा डॉक्टर संदीप इंदवर प्रधानाचार्य एस. वी. इंटर कॉलेज का पौधा देकर और बैज लगाकर किया गया |
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉo प्रवीण रस्तोगीने बताया कि एक शिक्षक होने के नाते हम बहुत कुछ कर सकते हैं ; या यू कहे कि शायद हम ही कुछ कर सकते हैं ! बदलती शिक्षा व्यवस्था के साथ शिक्षक के कार्य बहुत बदले, परंतु उसकी भूमिका आज भी वही है- वह आज भी एक माली है। इस संसार की कठोर वास्तविकताएं सहते हुए अनेकों बार मन में यह प्रश्न उठता है” क्या अब तक की हमारी शिक्षा ने हमें यथार्थ जीवन जीने योग्य बनाया है?”यह प्रश्न ही इस प्रधानाचार्य सम्मेलन की अभिप्रेरणा है।

प्राथमिक शिक्षा बालक के अंतर्मन में ज्ञान का बीज होती है और उसे बीज से नन्हे कोमल पौधों को उगते हुए देखते हैं, उनकी रक्षा करती है, विकास करती है, जबकि छोटे पौधे तनिक बड़े हो जाते हैं तो इनमें हरी हरी पत्तियां निकल आती हैं, तब इन पौधों को उच्च प्राथमिक और आगे की शिक्षा को सौंप देती है, इस स्तर पर इन पौधों को मजबूत बनाने का प्रयास किया जाता है। उनमें ज्ञान की खाद, संस्कारों का पानी, नैतिकता की धूप और तर्क की हवा प्रदान कर उन्हें मजबूती से सीधा खड़ा होना सिखाया जाता है। माध्यमिक शिक्षा तक आते-आते इन पौधों में अधिक सुंदर घने पत्ते, फूल होते हैं। यह सीधे जीवन के जोश से भरपूर अपनी ही रवानगी में जीते हुए इस समय संसार को अपनी मुट्ठी में भर लेने की तमन्ना है लिए डिग्री कॉलेज में प्रवेश लेते हैं,जहां माध्यमिक शिक्षा से प्राप्त ज्ञान पर पॉलिश करने का कार्य किया जाता है।
कार्यक्रम की श्रृंखला में तिलक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर हरिओम जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि इंटर के बाद छात्रों की सबसे बड़ी समस्या होती है कि अपने आप को कैसे प्रस्तुत करें , इसके लिए इंटर के दौरान ही उन छात्रों को मंच संचालन की विद्या सिखाई जाए, जिससे छात्रों के अंदर का डर निकल सके |
किशोर चंद कन्या इंटर कॉलेज, फरीदपुर की प्रधानाचार्य डॉक्टर बीनू सिंह ने छात्रों की गंभीर समस्या के बारे में बात करते हुए बताया कि आज का छात्र आज पढ़ना नहीं चाहता है वह केवल घर बैठे ही डिग्री लेना चाहता है, जिसके कारण छात्र कक्षाओं से अनुपस्थित रहते हैं | इस समस्या का समाधान बताते हुए उन्होंने बताया कि छात्र तो मेहनत करना चाहते हैं लेकिन छात्र की मेहनत तभी सफल हो सकती है जब अध्यापक भी उसका पूर्ण रूप से सहयोग करें |

विष्णु इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ शरद कांत शर्मा जी ने बताया कि कोई भी देश अपने सभी प्रकार के विकास के लिए युवाओं पर निर्भर करता है, और युवा देश के काम तभी आ सकते हैं जब उनके बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनका व्यावहारिक विकास भी हो | हमें सुविधाओं का रोना नहीं रोना है क्योंकि कमल हमेशा कीचड़ में ही खिलता है अर्थात मेहनत करने वाले छात्र सुविधाओं के न होने से परेशान नहीं होते हैं बल्कि वह अपनी मेहनत पर भरोसा करते हैं आज के परिपेक्ष में यह महत्वपूर्ण है कि छात्र क्या बनना चाहता है ना कि हम उसे क्या बनना चाहते हैं |
एसबी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर संदीप जी ने बताया कि आज हमने शिक्षा को एक मार्गी बना दिया है, मतलब सभी छात्रों को इंटर में पीसीएम ग्रुप ही लेना होता है , ना चाहते हुए भी उनके ऊपर माता-पिता का दबाव होता है या वह मित्रों की देखा देखी पीसीएम में प्रवेश ले लेते हैं, परंतु वह छात्र आगे चलकर जीवन में सफल नहीं हो पाते हैं , क्योंकि वह उसमें अच्छे तरीके से मेहनत नहीं कर पाते हैं और कहीं ना कहीं छात्रों के दिमाग में यह बात बैठा दी जाती है कि तुम जीवन में तभी सफल हो पाओगे जब पीसीएम से पढ़ोगे | इसी के साथ उन्होंने बताया कि छात्रों को ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदारियां का एहसास कराना भी अत्यंत आवश्यक है ताकि छात्र अपनी आजादी का प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकें |
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टर प्रवीण रस्तोगी जी ने कार्यक्रम की मुख्य वक्ता को आमंत्रित किया तथा मुख्य वक्ता डॉक्टर पूर्णिमा अनिल जी ने एक-एक करके अपने पूर्व के वक्ताओं के मुख्य बिंदुओं को आगे बढ़ाते हुए बताया कि किसी देश की शिक्षा का स्वरूप उस देश की संस्कृति से तय होता है क्योंकि संस्कृति से समाज , समाज से संस्कृति , समाज से शिक्षा और शिक्षा से समाज के लोगों के सोचने का तरीका बदल जाता है, और यही बदलाव व्यक्ति के व्यक्तित्व में दिखाई देता है |

यही कारण है कि जब कोई भी व्यक्ति अपने देश से बाहर अन्य देश में जाता है तो वह व्यक्ति अपने देश की संस्कृति समाज और शिक्षा का आईना होता है | उन्होंने बताया कि कैसे अवसर आपका दरवाजा खटखटाता है , बस उसे पहचानने की क्षमता होनी चाहिए , जो पहचान जाता है वही जीवन में सफल हो जाता है|
उन्होंने वर्तमान समय में इंटर के छात्रों की समस्याओं को बताते हुए बताया कि आज छात्र की सबसे बड़ी समस्या उसका उच्चारण और प्रस्तुतीकरण है जिस पर शिक्षकों के साथ-साथ महाविद्यालय के प्रबंधकों को भी ध्यान देने की आवश्यकता है । इसी के साथ उन्होंने वर्तमान समय में रोजगार के परिपेक्ष में भी बताया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता बस काम तो काम होता है बस उसे करने का तरीका अलग होना चाहिए, जिसके कारण समाज आपसे प्रभावित होता है और आप समाज की तस्वीर बदल सकते हैं परंतु उसके लिए आपको अपना पूर्ण समर्पण देना होगा तभी आप समाज में एक अपना नया मुकाम हासिल कर सकते हैं |

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महोदय ने अपने द्वारा दिए गए उदाहरण से कार्यक्रम के नाम सेतु को सार्थक कर दिया | उन्होंने बताया कि हर समय की अपनी अच्छाइयां और परेशानियां होती हैं, बदलाव जीवन का अभिनंदन है |
आज की शिक्षा ने हमें हमारी संस्कृति से अलग कर दिया है, शिक्षा वही सार्थक होती है जो व्यक्ति को एक सेतु बना देती है जो सेतु अपनी पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच का आधार होता है |
उन्होंने कहा कि आज के छात्रों को स्वतंत्रता और स्वतंत्रता में फर्क करना सीखना होगा | अगर छात्र इन दोनों में अंतर करना सीख गया तो दुनिया की कोई भी ताकत उस देश के विकास और उन्नति को नहीं रोक सकता और इस सबके लिए जो जरूरी आधार है वह उसकी शिक्षा है , क्योंकि शिक्षा के माध्यम से ही समाज का स्वरूप बदला जा सकता है |
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्रबंधक निदेशक डॉ विनय खंडेलवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी बुद्धिजीवियों, मुख्य अतिथि, अति विशिष्ट अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद दिया और इसी के साथ ही उन्होंने बताया कि छात्रों की उन्नति के लिए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, उसके लिए सभी शिक्षकों के सहयोग की आवश्यकता होगी |
कार्यक्रम के अंत में , महविद्यालय में उपस्थित हुए सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य को महाविद्यालय के प्रबंधक महोदय ने आभार पत्र देकर सम्मानित किया |
कार्यक्रम का मंच संचालन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ प्रवीण रस्तोगी ने किया | कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक गण उपस्थित रहे |



