शाहजहाँपुर

होम्योपैथिक डिस्पेंसरी : कागजों में शहर में, चल रहीं देहात में

Connect News 24

शाहजहांपुर। शहर के विभिन्न मोहल्लों में संचालित चार राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों को खत्म कर ग्रामीण इलाके के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि कागजों में ये अस्पताल अब भी शहर में ही चल रहे हैं। चार होम्योपैथिक अस्पतालों के बंद हो जाने से मरीजों का दबाव सीएमओ कार्यालय परिसर में संचालित अस्पताल पर बढ़ गया है। ओपीडी में एक डॉक्टर को रोजाना करीब 350 मरीज देखने पड़ रहे हैं। मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर जिला होम्योपैथिक अधिकारी भी मरीज देखती हैं।

नगर के विभिन्न मोहल्लों में चार राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों का संचालन होता था। ये अस्पताल लंबे समय से किराये के भवनोंं में चल रहे थे। शासन से किराया 100 रुपये निर्धारित था। मकान मालिकों ने किराया बढ़ाने का दबाव बनाया तो आयुष विभाग ने शासन से पत्राचार किया। किराये में बढ़ोत्तरी की अनुमति न मिलने पर मोहल्लों में संचालित अस्पतालों को खत्म कर दिया।

शहर के मोहल्ला एमनजई जलालनगर में संचालित अस्पताल को पीएचसी सेहरामऊ दक्षिणी, सदर के होम्योपैथिक अस्पताल को पीएचसी चांदापुर, अजीजगंज के अस्पताल को पीएचसी बरतारा और हथौड़ा के अस्पताल को पीएचसी सुंदरनगर में शिफ्ट कर दिया गया। इन अस्पतालों के शिफ्ट होने के बाद मरीजों का बोझ पुराने अस्पताल स्थित होम्योपैथिक डिस्पेंसरी पर बढ़ गया। शहरी क्षेत्र से हर रोज करीब 350 मरीज दवा लेने आते हैं। इसके चलते डॉक्टर भी परेशान रहते हैं। ओपीडी के बोझ को कम करने को जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. सुमन कुमारी को भी मरीज देखने पड़ते हैं।

फटाफट निपटाने पड़ते हैं मरीज

होम्योपैथिक चिकित्सक अमूमन पांच-छह मिनट में एक मरीज को ठीक से देख पाता है। डॉक्टर मरीज से लंबी बातचीत कर बीमारी का पता लगाने के बाद दवा देता है। वहीं सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चलने वाली डिस्पेंसरी में अगर डॉक्टर लगातार बैठकर भी मरीज देखे तो हर मरीज को एक से डेढ़ मिनट से ज्यादा दे पाना संभव नहीं। इसके बावजूद भीड़ देखते हुए डॉक्टर जल्दी-जल्दी मरीज को दवा देने का प्रयास करते हैं।

फ्री दवा, उससे अधिक देना पड़ रहा किराया

-होम्योपैथिक की दवा फ्री में भले मिलती हो, लेकिन मरीजों को उससे अधिक किराया देना पड़ता है। शहर के विभिन्न मोहल्लों से आने वाले मरीजों को नि:शुल्क दवा पाने का किराया अधिक खर्च करना पड़ता है।

जमीन के अभाव में फंसी डिस्पेंसरी

-नगर में डिस्पेंसरी बनाए जाने के लिए कई स्थानों पर नगर निगम की जमीन को देखा गया। जमीन चिन्हित होने के बाद भी डिस्पेंसरी के लिए नगर निगम के अफसर जमीन फाइनल नहीं कर पा रहे हैं। जमीन के लिए जिला होम्योपैथिक अधिकारी कई बार कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं।

भवन के अभाव में मोहल्लों में संचालित डिस्पेंसरी को पीएचसी पर शिफ्ट किया गया। जमीन मिलने पर फिर से मोहल्लों में डिस्पेंसरी शुरू कराई जाएगी।- डॉ. सुमन, जिला होम्योपैथिक अधिकारी


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