के.सी.एम.टी. कैंपस – 2 में किया गया प्रेरणादायक कार्यक्रम
पी. जी. आई. ऑफ मैनेजमेंट, के.सी.एम.टी. कैंपस - 2 में किया गया छात्रों तथा शिक्षकों हेतु ' दिल से दिल तक ' कार्यक्रम का आयोजन
आज दिनांक 19/10/2023, दिन गुरुवार को ‘ पी. जी. आई. ऑफ मैनेजमेंट, केसीएमटी कैंपस – 2 में शिक्षकों तथा छात्रों हेतु एक प्रेरणादायक कार्यक्रम दिल से दिल तक ‘ का आयोजन किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अथिति तथा मुख्य वक्ता ऐकेटीयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर आर के खंडाल रहे | कार्यक्रम में महविद्यालय के एम. डी. डॉ विनय खंडेलवाल, प्राचार्य डॉ प्रवीण रस्तोगी, डीन डॉ रविजीत सिंह तथा महविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे |

कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर व पुष्प अर्पण के साथ किया गया।
महविद्यालय के एम डी डॉ विनय खंडेलवाल ने कार्यक्रम के मुख्य अथिति का स्वागत एक पौधा देकर व बैज लगाकर किया तथा छात्रों का उत्साहवर्धन कुछ पंक्तियों के साथ किया –
जीवन में अभी असली उड़ान बाकी है,
हमारे इरादों का अभी इम्तिहान बाकी है,
अभी तो नापी है हमने थोड़ी मुठ्ठी भर जमीन,
अभी तो नापने के लिए पूरा आसमान बाकी है।

मुख्य अथिति महोदय ने जब अपने ओजपूर्ण वक्तव्य की शुरुआत की तब पूरा हाल तालियों की गढ़गड़ाहट से गूंज उठा |मुख्य अतिथि महोदय ने छात्रों को आगे बढ़ने तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु बहुत से आवश्यक सुझाव दिये |
लक्ष्य को पाने के लिए यदि हम तन, मन और धन लगा देते हैं,
सच कहता हूं छात्रों, कुंडली के सितारे भी अपनी जगह बदल देते हैं।
मुख्य अथिति महोदय ने छात्रों को बताया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जिनके जीवन का एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होते हैं और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सच्चा दृढ़संकल्प लेते हैं, और इसके लिए वे लगातार प्रयास करते रहते हैं।
कई छात्र ऐसे होते हैं जो मेहनत तो करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिलती है, जिसकी वजह से वे निराश होकर मेहनत करना ही छोड़ देते हैं और अपनी किस्मत को दोष देने लगते हैं, लेकिन उन्हें निराश नहीं होना चाहिए बल्कि कई ऐसे सफल लोगों से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने तमाम असफलता के बाद सफलता हासिल की है, क्योंकि सफलता पाने के लिए हर किसी को कड़ी मेहनत, संघर्ष और कई असफलताओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे बेहद कम लोग होते हैं जिन्हें बिना मेहनत और संघर्ष के ही अपनी मंजिल मिल जाती है।

हर किसी के पास अपना अलग सामर्थ्य और काबिलियत होती है। कोई छात्र पढ़ाई में अव्वल होता है, तो कोई छात्र स्पोटर्स्, म्यूजिक, डांस आदि क्षेत्रों में आगे होता है, जरूरी नहीं कि आप भी अपने क्लास में टॉपर की तरह 95 फीसदी अंक लाओ तभी आपका भविष्य संवर सकता है, बल्कि जरूरी यह है कि आप अपने अंदर की काबिलियत को समझे और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और उसे पाने के लिए खूब प्रयास करें तभी आप सफल इंसान बन सकते हैं।
बेहतर से बेहतर कि तलाश करो,
मिल जाए नदी तो समंदर कि तलाश करो,
टूट जाता है शीशा पत्थर कि चोट से,
टूट जाए पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो।
कई छात्रों ने मुख्य अथिति महोदय से बहुत से सवाल भी पूछे तथा मुख्य अथिति महोदय ने बहुत ही उम्दा तरीके से छात्रों के सवालों के जवाब भी दिये |
कार्यक्रम के अंत में महविद्यालय के डीन डॉ रविजीत सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया |
कार्यक्रम का सफल आयोजन महाविद्यालाय की प्राचार्य डॉ प्रवीण रस्तोगी ने कुशल नेत्रत्व में किया गया |



