Rampur News: भाजपा विधायक की शिकायत पर जांच के बाद हुई कार्रवाई
रामपुर। जौहर शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के बाद अब सपा कार्यालय (दारूल आवाम) और आजम खां के रामपुर पब्लिक स्कूल (आरपीएस) की जमीन भी सरकार ने वापस लेने का फैसला किया। तोपखाना रोड स्थित यह 3825 वर्ग मीटर (41181 वर्ग फीट) जमीन 2006 में प्रदेश कैबिनेट के फैसले के मुताबिक जौहर ट्रस्ट को 30 साल के लिए लीज पर दी गई थी। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने शिकायत की थी कि लीज की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। इसके बाद शासन ने मामले की जांच कराई और आरोप सही मिलने पर लीज को निरस्त कर दिया गया। अब यह जमीन माध्यमिक शिक्षा विभाग को वापस दी जाएगी।सपा नेता आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही हैं। जिस बिल्डिंग में रामपुर पबिल्क स्कूल और सपा कार्यालय संचालित होते हैं, उनमें पहले जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी और राजकीय मुर्तजा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित होते थे। सपा सरकार के दौरान आजम खां ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और ये भवन मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2012 में अपने नाम लीज पर ले लिया।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने पूरे मामले की शिकायत शासन से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पट्टा विलेख के बिंदु संख्या-7 में यह स्पष्ट रूप से अंकित है कि आवंटित भूमि पर एक वर्ष के भीतर विश्वविद्यालय के संचालन के लिए निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य प्रयोजन के लिए भूमि का प्रयोग नहीं किया जा सकता और यदि ऐसा होता है, तो यह पट्टा निरस्त हो जाएगा।
उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। जिसमें आरोप था कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए आवंटित भूमि पर रामपुर पब्लिक स्कूल और समाजवादी पार्टी के कार्यालय का संचालन होता है, जो आवंटन नियमों के खिलाफ है। इससे शासन को वित्तीय क्षति पहुंची है। इस मामले में मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। जांच में सभी आरोप सही पाए गए। जिस पर जिलाधिकारी ने पट्टा निरस्त करने की संस्तुति की है। मंगलवार को प्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को आवंटित की गई 3825 वर्ग मीटर भूमि की लीज निरस्त कर दी गई।
सरकारी विद्यालय को खाली कराकर बनवाया था निजी स्कूल व कार्यालय
सपा नेता आजम खां ने जिस राजकीय मुर्तजा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को खाली कराकर सपा कार्यालय बनाया था, उस विद्यालय में उस वक्त करीब चार हजार बच्चे पढ़ते थे। यह बात वर्ष 1990 के दशक की है। किंतु आजम खां ने अपनी राजनीति को चमकाने के लिए 1995 में विद्यालय के भवन को खाली करा लिया और जौहर ट्रस्ट के नाम करा लिया।
महज 100 रुपये की सालाना लीज पर ट्रस्ट के नाम करा ली थी जमीन
सपा नेता आजम खां ने अपने राजनीतिक रसूख के चलते सिर्फ सौ रुपये सालाना किराये पर करोड़ों की जमीन अपने ट्रस्ट के नाम करा ली। बात वर्ष 2012 की है। तब सूबे में सपा की सरकार थी और आजम खां उस सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। तब आजम खां के पास नगर विकास, अल्पसंख्यक कल्याण जैसे सात विभाग थे। उनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी उनकी बात नहीं टालते थे। सरकार ने यह जमीन जौहर ट्रस्ट को दे दी। संवाद
अपर जिलाधिकारी प्रशासन के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी ने की थी जांच
जौहर ट्रस्ट को आवंटित की गई जमीन के दुरुपयोग के मामले में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। जिसके बाद सरकार के आदेश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन लालता प्रसाद शाक्य के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इस टीम में उपजिलाधिकारी सदर जगमोहन गुप्ता, जिला विद्यालय निरीक्षक मुन्ने अली, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी संजीव कुमार भी शामिल थे। संवाद
करीब 100 करोड़ रुपये है जमीन की कीमत
सपा नेता आजम खां को आवंटित जमीन की कीमत करीब सौ करोड़ रुपये है। दरअसल, यह जमीन किले को जाने वाली रोड के किनारे स्थित है, जिसका फ्रंट करीब आधा किलोमीटर है। जमीन का कुल रकबा 3825 वर्ग मीटर है। राजस्व विभाग के अफसरों की मानें तो जमीन की वास्तविक कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है, जिसको सपा सरकार ने मात्र 100 रुपये सालाना पर आजम खां की जौहर ट्रस्ट को आवंटित किया था।