Rampur News: प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों की कमी से जूझ रहे राजकीय इंटर कॉलेज
रामपुर। शाहबाद की लगभग छह लाख की आबादी के बीच संचालित छह राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं। इसके चलते चार हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं की विधिवत पढ़ाई नहीं हो पा रही है। मात्र दो-चार प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के सहारे सभी इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। कुछ शिक्षक पीटीए (शिक्षक-अभिभावक संघ) के माध्यम से रखे जाते हैं। इसकी वजह से पढ़ाई सुचारू नहीं हो पाती है।
कॉलेजों में प्रवक्ता और सहायक अध्यापक न होने के कारण विद्यार्थियों के अभिभावकों को कोचिंग का भार उठाना पड़ता है। गरीब और मध्यम आर्य वर्ग के लोगों के बच्चों के लिए राजकीय इंटर कॉलेज अच्छी शिक्षा का सुलभ साधन हैं, लेकिन यहां प्रवक्ता और सहायक अध्यापक न होने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों की बजाय पीटीए से रखे गए शिक्षक ठीक से नहीं पढ़ाते हैँ। इसके चलते छात्रों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है।
हर कॉलेज में शिक्षकों का टोटा
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पटवाई में 9 पदों में से केवल अंग्रेजी के प्रवक्ता हैं। वहीं सात स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल दो सहायक अध्यापक हैं। राजकीय इंटर कॉलेज पटवाई में नौ की जगह सिर्फ एक प्रवक्ता हैं। वहीं सात में से चार सहायक अध्यापक हैं। राजकीय इंटर कॉलेज शाहबाद में कुल 12 प्रवक्ताओं में से सिर्फ केमेस्ट्री के प्रवक्ता हैं और 21 में से चार सहायक अध्यापक है। सहायक अध्यापकों के 17 पद रिक्त हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 10 पदों के सापेक्ष कोई प्रवक्ता नहीं है। वहीं 14 में से चार सहायक अध्यापक हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज हुसैनगंज अनवा में 17 में से तीन सहायक अध्यापक हैं। यहां भी कोई प्रवक्ता नहीं है।
कोचिंग सेंटर संचालकों की चांदी
क्षेत्र के इंटर कॉलेजों में कई विषयों के प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के न होने से निजी कोचिंग सेंटर संचालकों की चांदी है। विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूल की जा रही है। जिसका भार अभिभावकों पर पड़ रहा है। इनमें सबसे ज्यादा विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी होते हैं। कॉलेजों में प्रवक्ता न होने के चलते अच्छी पढ़ाई नहीं हो पाती है। इसलिए कोचिंग सेंटर का सहारा लेना पड़ता है।
इन दिनों कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। शासन को समय-समय पर शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए प्रस्ताव भेजते रहते हैं। पीटीए के माध्यम से शिक्षकों की कमी पूरी की जाती है ताकि छात्रों का भविष्य खराब न हो। – मुन्ने अली, डीआईओएस रामपुर