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Shahjahanpur News: मरीज लाचार, पत्राचार में फंसा 500 बेड अस्पताल

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Patients helpless, 500 bed hospital stuck in correspondence

डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य

शाहजहांपुर। बीमारी से लाचार मरीज सरकारी अस्पतालों में बेड पाने के लिए भटक रहे हैं लेकिन अफसरों की सुस्ती उन पर भारी पड़ रही है। 500 बेड का अस्पताल शासन और प्रशासन के बीच पत्राचार में ही फंसा हुआ है तो वहीं 100 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य ही अब तक पूरा नहीं हो पाया।

चिकित्सीय सुविधाओं को पटरी पर लाने के उद्देश्य से कांट-जलालाबाद रोड पर जिगनेरा गांव के पास 500 बेड के अस्पताल के लिए पांच एकड़ जमीन इसी साल मार्च में मिल चुकी है। अस्पताल का निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है पर विभाग ने अब तक एस्टीमेंट तक तैयार नहीं किया है। इतना ही नहीं कार्यदायी संस्था तक नामित नहीं की गई। इस कारण प्रोजेक्ट अधर में है।

शासन ने अजीजगंज स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेड की मारामारी को खत्म करने के लिए 100 और 500 बेड के अस्पताल का प्रोजेक्ट बनाया गया था। 100 बेड अस्पताल 2018 में बन जाना था लेकिन फर्म की सुस्त कार्यप्रणाली से कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ। फर्म से पिछले महीने काम छीन लिया गया था। अब 100 बेड के अस्पताल के निर्माण के लिए दोबारा से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

अस्पताल बनने पर मरीजों को मिलेगी राहत : राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद बेहतर इलाज के लिए अपने जिले के अलावा पड़ोसी जनपदों के लोगों की उम्मीदें बढ़ गईं हैं लेकिन यहां व्यवस्थाएं जिला अस्पताल वाली हैं। यहां करीब 500 बेड की व्यवस्था है लेकिन वायरल बुखार के सीजन में मरीजों को यहां बेड तक नहीं मिल पाए। स्ट्रेचर पर मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, एक बेड पर तीन-तीन मरीजाें को भर्ती करना पड़ा। जगह के अभाव में मरीजाें के इलाज में आ रही कठिनाई सौ बेड व पांच सौ बेड का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद कम हो जाएगी। बेड भी करीब 1100 हो जाएंगे। अस्पताल बनने से चिकित्सा सेवाओं में विस्तार हो जाएगा। साथ ही बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी।


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