Shahjahanpur News: डेढ़ साल की कवायद पर बजट का पेच, कब शुरू होगा काम

शाहजहांपुर के विसरात रोड स्थित हनुमतधाम।
विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष : भगवान परशुराम की जन्मस्थली के विकास की कवायद अटकी
संवाद न्यूज एजेंसी
जलालाबाद। करीब डेढ़ साल पहले प्रदेश सरकार ने नगर को भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित कर उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा की गई थी लेकिन बजट का पेंच फंस जाने से अब तक इस दिशा में कार्य आगे नहीं बढ़ सका है।
करीब तीन साल पहले केंद्र सरकार ने करीब ढाई करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इस धनराशि से मंदिर में पत्थर लगवाया गया, सामुदायिक शौचालय, पीने के पानी आदि की समुचित व्यवस्था के अलावा रामताल के आधे हिस्से में घाट और सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया था। पर अब यहां स्थिति काफी खराब है। देखरेख के अभाव में जहां कई जगह पत्थर टूट चुके है। वहीं, घाट पर आवारा पशुओं का डेरा बना रहता है। इसके अलावा साफ सफाई की व्यवस्था भी बदतर है।
इसी क्रम में बीते साल 24 अप्रैल 2022 को मंदिर पर आयोजित जनसभा में प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद समेत कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में नगर को भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित कर उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का वादा किया था।
इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए जितिन प्रसाद और सुरेश खन्ना ने अलग-अलग दौरा कर जन्मस्थली के विकास की कार्ययोजना आगामी पचास वर्षों की जरूरत के अनुरूप तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। जिसके बाद विस्तृत सर्वे कर कार्ययोजना तैयार की गई और अनुमानित लागत के अनुरूप 87 करोड़ का बजट बनाकर प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था। उसके बाद बजट का पेंच फंस जाने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका।
अक्षय तृतीया पर यहीं हुआ था जन्म
मान्यता है कि नगर से कुछ दूर गांव ढकियाइन में प्राचीन समय में स्थित रहे जमदग्नि ऋषि के आश्रम में अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में जन्म लिया था। समय-समय पर कई विद्वानों द्वारा किए गए शोध में भी इस बात की पुष्टि करने पर इस मान्यता को और बल मिलता रहा। लंबा समय बीतने के बाद भी ऋषि जमदग्नि का आश्रम, यहां स्थापित मां रेणुका और जमदग्नि की मूर्ति वाले प्राचीन मंदिर, जमदग्नि नाम की विशाल झील तथा परशुराम से जुड़े कई अन्य स्थानों की मौजूदगी मूक गवाह के रूप में आज भी मौजूद हैं। भगवान परशुराम से जुड़े इन स्थलों में सबसे अहम और श्रद्धा का केंद्र है नगर के मोहल्ला खेड़ा में भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर। कई फुट ऊंचे टीले पर स्थित इस मंदिर के सामने करीब 85 बीघा के रकबे में फैला रामताल श्रद्धालुओं को पहली नजर में विशिष्टता का एहसास करा देता है।
हनुमतधाम में अब बनेगा रोप-वे
हनुमत धाम पर दस साल पहले सन 2013 में 104 फुट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति लगाई गई थी। अब सिटी पार्क से हनुमधाम तक रोप-वे का निर्माण होगा। वर्तमान समय में हनुमतधाम पर घाटों का निर्माण कार्य चल रहा है। पश्चिमी घाट पर मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण किया गया है, जिसके बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर कार पार्किंग हो सकेगी, जबकि फर्स्ट फ्लोर पर रेस्टोरेंट रहेगा। इससे हनुमतधाम पर पर्यटन को बढ़ावा मिल सकेगा।
पर्यटन स्थलों में पटना देवकली का शिव मंदिर भी शामिल
कलान। कलान से बदायूं मार्ग पर 12 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पटना देवकली में एक प्राचीन शिव मंदिर है। एक अनुश्रुति के अनुसार यहां दैत्यगुरु शुक्राचार्य का आश्रम था, जोकि शिवभक्त थे। उन्होंने ही आठ शिवलिंगों की स्थापना की। इतिहासकार डॉ. एनसी मेहरोत्रा के अनुसार समय के साथ मंदिर ध्वस्त हो गया। इसका रातों रात निर्माण किया गया। मंदिर बनाने वालों ने दारानगर नामक ग्राम में डेरा डाला जो पटना देवकली के निकट ही है। इसके समीप प्राचीन टीले हैं। श्रावण मास में एकादशी से त्रयोदशी तक यहां मेला लगता है। जिसमें हजारों शिव भक्त जलाभिषेक तथा पूजा अर्चना के लिए आते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर जनपद में प्राचीन व मान्यता प्राप्त धार्मिक स्थलों के विकास के लिए योजना तैयार की थी। जिसके तहत हर स्थल को एक करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। इस योजना में जनपद के चयनित सात स्थलों में पटना देवकली का शिव मंदिर भी शामिल है। संवाद

शाहजहांपुर के विसरात रोड स्थित हनुमतधाम।