Shahjahanpur News: ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी से खतरे में खेत की सेहत

उप कृषि निदेशक कार्यालय में बनी लैब में मिट्टी की जांच करते हुए कर्मचारी। संवाद
शाहजहांपुर। जिले की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी पाई जा रही है जिससे खेतों में पोषक तत्वों में कमी हो रही है और फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए किसानों को गोबर से बनी खाद को इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है जिससे ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी को पूरा किया जा सके।
कृषि विभाग की ओर से जिले में पिछले वर्ष 30 गांवों से 10, 690 मिट्टी के नमूने जांच के लिए गए थे जिनकी जांच में पता चला कि खेतों में मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी पाई जा रही है। जिसकी वजह से बताई जा रही है कि अधिक रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल करने से इनकी कमी होती है। इससे मिट्टी में पोषक तत्व कम हो जाते हैं। फसल के निचली पत्ते पीले पढ़ने लगते हैं। फसल पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि मृदा में ऑर्गेनिक कॉर्बन 0.8 प्रतिशत तक होना चाहिए। कई स्थानों पर यह 0.3 तक मिला है।
गोबर की खाद है उपयोगी
मृदा में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने में सबसे अधिक उपयोगी गोबर की खाद बताई गई है। इसका उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही पराली को भी खेत में गलाकर इन तत्वों को भी पूरा किया जा सकता है। पराली को नष्ट करने में डीकंपोजर इस्तेमाल कर सकते हैं।
छह ग्राम पंचायत से 90-90 नमूने लिए
वर्ष 2023-2024 मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिले के 15 ब्लॉकों में प्रत्येक में छह ग्राम पंचायत चिह्नित की गईं हैं। इनमें एक ग्राम पंचायत से मिट्टी के 90 नमूने लिए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए कृषि विभाग की ओर से 43 फील्ड वर्कर लगाए गए है। कृषि विभाग के मुताबिक अब तक 92 प्रतिशत मिट्टी के नमूने लिए जा चुके हैं। इनकी जांच कराई जा रही है। जांच कराने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा। कार्ड में बताया जाएगा कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, उसमें किस उर्वरक का इस्तेमाल कितनी मात्रा में करना है। इससे मिट्टी में पोषक तत्व बने रहें और खेती की गुणवत्ता बनी रहेगी।
बरेली में भी कराई जाती है जांच
जिले में उप कृषि निदेशक कार्यालय, जलालाबाद, तिलहर और पुवायां तहसील में मिट्टी की जांच लैब हैं। इसमें अभी आयरन, मैगनीज, कॉपर और जिंक की जांच की व्यवस्था नहीं है। इसकी जांच बरेली लैब से कराई जाती है। इसमें पीएचईसी, आर्गेनिक कार्बन, बोरान, सल्फर, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की जांच होती है। 12 दिन में रिपोर्ट आने पर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दे दिया जाता है।
पिछले वर्ष कराई की मिट्टी की जांचों में पता चला था कि जिले की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी है। अब मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाए जा रहे हैं। इसमें किसानों को बताया जा रहा है कि खेती में गोबर की खाद का अधिक से अधिक उपयोग करें। इससे पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है।
– धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक