Shahjahanpur News: गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, खरीफ की फसलें तबाह

मिर्जापुर बाढ़ में डूबकर नष्ट हुईं खरीफ फसलें। संवाद
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। गांव पहले से ही जलमग्न हैं। बाढ़ में डूबी खरीफ की अधिकांश फसलें नष्ट हो गईं हैं। गन्ने की जड़ से निकलने वाले कल्ले डूबे रहने से नष्ट होने के कगार पर हैं। इससे गन्ने की लागत निकलना भी मुश्किल है। फसल नष्ट होने से परेशान किसान अब सिर्फ प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद लगाए हुए हैं।
बाढ़ क्षेत्र की जलमग्न सड़कें खुल गईं हैं। भरतपुर-बांसखेड़ा, पैलानी, कटैला नगला संपर्क मार्ग पर जहां बाढ़ में सड़क कट गई थी, वहां अब एक से दो फुट ही पानी रह गया है। अब लोग यहां से पैदल निकलने लगे हैं। दोपहिया और चार पहिया वाहन अब भी नहीं निकल पा रहे हैं। ग्राम कटैला नगला निवासी पूर्व प्रधान शिवकुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र की लगभग सभी खरीफ फसलें ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, तिल, मूंगफली, मेंथा, शकरकंद आदि लगभग पूरी तरह नष्ट हो गईं हैं। गन्ने में भी नए कल्ले पानी में डूबे रहने से खराब हो गए हैं। फसलों के नष्ट हो जाने से किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। गांव के रामशंकर दीक्षित ने कहा कि फसलों के साथ ही अधिकांश कच्चे घरों की दीवारें बाढ़ के पानी में ढह गईं हैं। इससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
ग्राम पैलानी निवासी रघुवीर सिंह और अनुज कुमार ने बताया कि जो घर कुछ ऊंचाई पर बने हैं, उनमें से पानी निकल गया है। नीचे बने घरों में अब भी जलभराव है। गांव भर में कीचड़ होने से निकलना मुश्किल हो रहा है। इस्लामनगर के हाफिज फरमान व जान मोहम्मद ने बताया कि बाढ़ भले ही हल्की हुई है, लेकिन मजदूरी करने वाले बाढ़ पीड़ित लगभग 20 दिन से घर में कैद हैं। बाढ़ के समय राशन की दुकान से प्रतिमाह मिलने वाला राशन भी खत्म हो जाने से खाने-पीने की बहुत दिक्कत है।
लगभग 20 दिन से जलमग्न ग्राम मस्जिद नगला के आबिद, फिरोज, शम्मी और परवेज ने दुख जताते हुए कहा कि घरों में बाढ़ का पानी आ जाने से छतों, सड़कों और पैलानी के अंत्येष्टि स्थल में शरण लिए रहे बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन खाने के लिए राशन नहीं दे सका तो बाढ़ में नष्ट होने पर मुआवजा कहां से देगी।
बाढ़ पीड़ितों को बताया गया कि पिछले दिनों डीएम उमेश प्रताप सिंह और शनिवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. सुरेश कुमार फसल नुकसान का सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाए जाने का आश्वासन दे गए थे। इस पर बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि प्रतिवर्ष कम या अधिक बाढ़ का दंश झेलते हैं। हर वर्ष अधिकारी फसल नुकसान का सर्वे करवाकर मदद की बात कहते हैं, लेकिन फसल नुकसान का कभी भी मुआवजा नहीं मिला।
दो दिन से लगातार गंगा का बढ़ रहा जलस्तर
शारदा नहर खंड की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, गंगा पर भैसार ढाई घाट तटबंध पर शनिवार को 143.38 गेज था, जो कि रविवार को बढ़कर 143.40 गेज हो गया। गर्रा नदी का जलस्तर शनिवार को 144.10 गेज था, जो कि रविवार को बढ़कर 145.05 गेज हो गया है। खन्नौत नदी का जलस्तर में भी रविवार को वृद्धि हुई है। रविवार को गंगा में नरौरा बैराज से 1,07213 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 38,040 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गर्रा नदी में भी दियूनी बैराज से मामूली पानी छोड़ा गया है।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में फसलों के हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। बाढ़ के हालात में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
– डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी

मिर्जापुर बाढ़ में डूबकर नष्ट हुईं खरीफ फसलें। संवाद

मिर्जापुर बाढ़ में डूबकर नष्ट हुईं खरीफ फसलें। संवाद