Budaun News: मुश्किल में सब्जियों का राजा… सरसों को भी माहु से खतरा

उझानी में आलू की फसल। संवाद
उझानी। मौसम के बदले मिजाज ने सब्जियों के राजा आलू को मुश्किल में डाल दिया है। बाजार में हालांकि अगेती आलू की फसल आ चुकी है, लेकिन ऐसे ही कुछ दिन कोहरा और पड़ा तो आलू के पौधों की पत्तियां झुलसने लगेंगी। इसी तरह सरसों पर भी माहू का प्रकोप होने का अंदेशा बढ़ रहा है। ऐेसे में किसान चिंतित हैं।
आलू का रकबा पिछले साल के मुकाबले इस बार अधिक है। करीब एक-डेढ़ महीने पहले गाड़े गए आलू के पौधे बढ़वार पकड़ चुकी है। तीन-चार दिनों से कोहरे ने आलू के पौधों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कोहरे के दौरान सबसे ज्यादा खतरा पिछेती झुलसा का रहता है। हालांकि अब तक आलू की पत्तियां पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ दिन और कोहरा बरकरार रहा तो पत्तियां झुलसीं नजर आने लगेंगी।
कृषक भगमल चौधरी ने बताया कि पिछले सालों में दिसंबर के अंतिम दिनों और जनवरी की शुरुआत में आलू को पिछेती झुलसा से काफी नुकसान हो चुका है। इधर, खेतों में सरसों भी लहलहा रही है। नेत्रपाल के मुताबिक- माहु सबसे ज्यादा असर पीले फूल वाले पौधों पर डालता है। ऐसे में सरसों के दाने फली के अंदर ही खराब हो जाते हैं। ऐसे में माहु के प्रकोप का अंदेशा बढ़ गया है।-
गेहूं की हो गई बल्ले-बल्ले
कड़ाके की ठंड के बीच कोहरे ने अगर किसी फसल को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाया है तो वह गेहूं की फसल है। पिछले दिनों में कोई खास ठंड नहीं होने से खेतों में नमी कम होने से गेहूं के पौधों की बढ़वार प्रभावित होने लगी थी। किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को भी बढ़वार प्रभावित होने का अंदेशा सताने लगा था। अब, ठंड बढ़ जाने से गेहूं की फसल के लिए औसत तापमान बन गया है। यह गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है।
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कोहरे के दौरान पिछेती झुलसा का प्रकोप बढ़ जाता है। इसकी चपेट में आने से आलू की पत्तियों के झुलसने से पौधे का डंठल और जमीन के अंदर कंद सड़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि इसके बचाव के लिए पहले से ही इंतजाम कर लिए जाएं।
– डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक


