Budaun News: राजकीय मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी आधी से कम, खतरे में पड़ी मान्यता

राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद
– आरटीआई से हुआ खुलासा, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की गाइडलाइन से काफी कम हैं यहां व्यवस्थाएं
मनोज वर्मा
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं के चलते प्राचार्य को हटाया गया था। दूसरे प्राचार्य को यहां तैनात किया गया, ताकि एनएमसी (राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग) की गाइडलाइन के मुताबिक यहां मानक पूरे हो सकें। ऐसे में कुछ व्यवस्थाओं में तो सुधार देखने को मिला, लेकिन फैकल्टी बढ़ने के बजाए आधे से भी कम हो गई। यह खुलासा जन सूचना से हुआ है। ऐसे में अगर एनएमसी यहां निरीक्षण करती है तो कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खरीद के नाम पर हुईं अनियमितताओं के उजागर होने पर यहां पर तैनात रहे प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता को हटाते हुए दो महीने पहले निदेशालय में संबद्ध डॉ. एनसी प्रजापति को यहां का प्राचार्य बनाया गया। उनके सामने यहां कई चुनौतियां थीं। नवागत प्राचार्य ने यहां कुछ अव्यवस्थाओं को दूर किया, लेकिन फैकल्टी का मानक वह भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। (संवाद)
18 प्रोफेसर की जरूरत है, सात बताए गए मौजूद हैं पांच
राजकीय मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की उपलब्धता जानने के लिए जो आरटीआई डाली गई थी उसके जवाब के हिसाब से एनएमसी के मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में जहां 18 प्रोफेसर की जरूरत है, वहां सात प्रोफेसर बताए गए हैं, जो मौजूदा समय में उनकी संख्या पांच है। एसोसिएट प्रोफेसर यहां मानक के तहत 29 होने चाहिए जिसमें 16 दर्शाए गए हैं उसमें से भी मौजूदा समय में 11 रह गए हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर यहां 43 होने चाहिए जिसमें 30 दर्शाए गए हैं। इनकी संख्या भी मौजूदा समय में काफी घट गई है।
मोर्चरी भी नहीं हो पाई शुरू, पोस्टमार्टम नहीं सीख पा रहे मेडिकल छात्र-छात्राएं
राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को एनएमसी की गाइड लाइन के मुताबिक पोस्टमार्टम दिखाने चाहिए, लेकिन यहां मोर्चरी ही चालू नहीं हो पाई है। मोर्चरी की बिल्डिंग भी तैयार है और उसमें जो उपकरण चाहिए उसका बजट भी काफी समय पहले ही जारी हो चुका है, इसके बाद भी मोर्चरी शुरू नहीं कराई गई है।
पोस्टमार्टम प्रक्रिया भी एनएमसी की गाइडलाइन में शामिल है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो पा रहा है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनसी प्रजापति का कहना है कि पोस्टमार्टम जिला अस्पताल के डॉक्टर या फिर सीएमओ के अधीन डॉक्टर करते हैं उनसे बात की जा रही है, फिलहाल बच्चों को जिला अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम सिखाने के लिए भेजा है।
बंद पड़ीं लिफ्ट, सीढि़यां चढ़ते-चढ़ते हांफ रहे मरीज
राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीज और उनके तीमारदारों की सहूलियत के लिए लगाई गईं लिफ्ट भी काफी समय से खराब पड़ी है। ऐसे में तीन से चार मंजिल तक मरीज और तीमारदारों को सीढि़यों के सहारे ही वार्डों में जाना पड़ रहा है। इससे उनकी हालत और खराब हो रही है। इसकी शिकायत के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से लिफ्ट सही नहीं कराई गई है।
मानक पूरे न होने पर जा चुकी है 40 मेडिकल कॉलेज की मान्यता
हाल ही में एनएमसी के मानक पूरे न होने पर देश भर में 40 मेडिकल कॉलेज की मान्यता जा चुकी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों की मानें तो यहां भी एनएमसी जल्द ही दौरा करने वाली है। ऐसे में यहां फैकल्टी पूरी न होना, मोर्चरी शुरू न होने समेत कई बिंदु ऐसे हैं जिसके चलते इस कॉलेज की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है।
यह हैं एनएमसी के मुख्य मानक
– मेडिकल कॉलेज में 80 प्रतिशत से ऊपर फैकल्टी होनी चाहिए।
– ओपीडी काउंटर से लेकर वार्ड तक सीसीटीवी कैमरे।
– आधार बेस बायोमेट्रिक हाजिरी।
– हॉस्पिटल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर चालू होना चाहिए।
– मोर्चरी चालू होनी चाहिए।
– मेडिकल छात्र-छात्राओं की क्लीनिकल पोस्टिंग होनी चाहिए।
– एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को कम से कम 15 पोस्टमार्टम दिखाना।
राजकीय मेडिकल में हमने आभा एप से घर बैठे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके अलावा नए ओपीडी काउंटर, हाई स्पीड इंटरनेट सेवा, सामुदायिक बस सेवा शुरू कराने के साथ ही सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक हाजिरी शत प्रतिशत शुरू कराई हैं। फैकल्टी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
– डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद


