बरेली

ये कहानियां फिल्मी नहीं हैं: शोहदों के सब्जबाग की शिकार हो रहीं किशोरियां, पहचान बदलकर किया जाता है ब्रेनवॉश

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Teenage girls are brainwashed by changing identities then pushed into quagmire of crime

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आपने ऐसी कई फिल्में और वेबसीरीज देखी होंगी, जिनमें कोई शख्स नाम और पहचान बदलकर किसी युवती या किशोरी से नजदीकी बढ़ाता है। झांसे में लेकर उसका शोषण करता है। फिर कुछ कोई अपराध करने के लिए उकसाता है। रील लाइफ (फिल्म) में जब आप ये सीन देखते हैं तो सही सोचते होंगे कि युवती की ये कैसी मूर्खता है? 

कोई किसी की बातों में कैसे आ सकता है? और आसानी से उसे ही दोषी ठहरा देते होंगे। …लेकिन यह सब यदि रियल लाइफ (वास्तविक जीवन) में किसी की बहन-बेटी के साथ हो तो पैरों के नीचे से जमीन खिसकने जैसा है। शहर में भी किशोरियों का ब्रेनवॉश करके उनके साथ अपराध करने का चलन बढ़ा है। 

कई किशोरियां अपराधियों के झांसे में आकर अपराध के दल-दल में फंस रही हैं। ज्यादातर मामलों ने आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किशोरियों को शिकार बनाया। बाल कल्याण समिति में इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं। पढ़िए एक रिपोर्ट।

केस – 1

15 साल की एक किशोरी से उसकी कोचिंग के पास रहने वाले 25 साल के आरुष ने मदद के बहाने बातचीत शुरू की। बातचीत का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब कोचिंग के बाहर किशोरी को एक अनजान युवक ने छेड़ा और आरुष किशोरी की मदद के लिए आगे आया। धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती से बढ़कर प्यार में तब्दील हो गई। करीब छह महीने बाद किशोरी को इस बात का पता चला कि आरुष का वास्तविक नाम अरफान है। किशोरी ने सच छिपाने का विरोध किया। आगे रिश्ते में रहने से इन्कार किया तो अरफान और उसके दोस्तों ने किशोरी के स्कूल, कोचिंग और घर के आस-पास यह बात फैला दी कि किशोरी अरफान के साथ लंबे समय से रिश्ते में है। किशोरी के परिजनों ने पुलिस में शिकायत की तो मामला बाल कल्याण समिति तक पहुंचा। समाज में बात फैलने की वजह से परिजन घर बदलने के लिए मजबूर हैं।


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