Shahjahanpur News: सपा जिलाध्यक्ष ने रात में लखनऊ से मंगाया सिंबल, आनन-फानन तैयार किया प्रत्याशी
शाहजहांपुर। नामांकन से एक दिन पहले प्रत्याशी अर्चना वर्मा के सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो जाने पर पूरी रात मंथन का दौर चला। सपा की आपात बैठक में पार्टी के कद्दावर नेताओं से बातचीत के बाद पूर्व जिला उपाध्यक्ष सर्वेश राठौर की पुत्रवधू माला राठौर को महापौर पद का प्रत्याशी बनाने पर सहमति बन गई। इसके बाद आनन-फानन पूर्व जिला महासचिव रणंजय यादव को कार से लखनऊ भेजकर माला राठौर के नाम से पार्टी का सिंबल मंगाया गया। सुबह सारी तैयारी पूरी कर माला का नामांकन दाखिल कराया गया।
सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने अर्चना वर्मा का नाम महापौर प्रत्याशी के लिए आगे बढ़ाया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी थी। रविवार को हाई पॉलिटिकल ड्रामा होने के बाद सपा के सारे समीकरण ध्वस्त हो गए। ऐन वक्त पर अर्चना वर्मा के पार्टी छोड़ जाने पर सपा जिलाध्यक्ष ही सबसे ज्यादा निशाने पर आ गए। प्रत्याशी का नामांकन सपा के लिए नाक का सवाल बन गया। इसके बाद जिलाध्यक्ष ने हालात सुधारने की गरज से पूर्व विधायक राजेश यादव के घर बैठक की।
इसमें सभी नामों पर विचार विमर्श किया गया। सपा नेताओं में माला राठौर के नाम पर सहमति बन गई। माला राठौर का आवेदन पूर्व में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा जा चुका था। अब सिंबल की समस्या सामने आ गई। तनवीर खां ने पूर्व जिला महासचिव रणंजय यादव को रात में ही लखनऊ रवाना किया। सुबह पांच बजे रणंजय यादव पार्टी सिंबल लेकर लौटे। देर रात तक चली बैठक में सपा के सभी नेताओं ने नए प्रत्याशी को पूरी ताकत से लड़ाने की रणनीति तैयार की। सिंबल आने के बाद नामांकन की तैयारी पूरी की गई। दोपहर दो बजे के बाद प्रत्याशी को लेकर सपा नेता कलक्ट्रेट पहुंचे और नामांकन कराया। जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने कहा कि पूरी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत से खड़ी है। महापौर का चुनाव सपा ही जीतेगी।
एक ही दांव से दो बार पटखनी खाने पर आलाकमान नाराज
सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां भी ऐसे किसी घटनाक्रम के लिए तैयार नहीं थे। लिहाजा कोई बैकअप प्लान नहीं बनाया था। हालांकि अर्चना वर्मा के भाजपा में जाने की अटकलें काफी समय से लगाई जा रही थीं। तब सपाई मानते रहे कि प्रत्याशी को परेशान करने के लिए विरोधी ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं। पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान सपा प्रत्याशी के पाला बदलने की घटना के बाद सपा नेतृत्व से अतिरिक्त सावधानी बरतने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक ही दांव से दो बार पटखनी खाने पर सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व बेहद नाराज है। पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद नजर रख रहे हैं।
फिर कमजोर साबित हुई सपा
2017 के बाद से जिले में समाजवादी पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने सभी छह सीटों पर मात खाई थी। तब से जिला कार्यकारिणी भंग चल रही है। कुछ समय पहले तनवीर खां को फिर से जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया था। बाकी जिला कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की गई है। कई बार जिलाध्यक्ष के विरोध में स्वर भी पार्टी के अंदर से उठते रहे हैं। बगैर संगठन के पार्टी नगर निकाय के चुनाव में उतरी है। 1992 में सपा की स्थापना के बाद से 2022 में पहला मौका आया था जब पार्टी का एक भी सदस्य विधायिका में नहीं हैं।
लोध बिरादरी के वोटों पर भाजपा की नजर
स्वर्गीय राममूर्ति सिंह वर्मा लोधी बिरादरी के बड़े नेता थे। सपा के संस्थापक सदस्यों में शुमार राममूर्ति का प्रभाव जिले के साथ ही आसपास के क्षेत्र में भी था। वह चार बार विधायक और सांसद भी रहे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से विधायक रोशनलाल वर्मा सपा में चले गए थे। तब लोध बिरादरी को साधने के लिए भाजपा ने जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश वर्मा को जलालाबाद से प्रत्याशी बनाया था। नगर निगम क्षेत्र में लोध बिरादरी की संख्या अच्छी खासी है। माना जा रहा था कि सपा के मुस्लिम-यादव के साथ लोध बिरादरी के वोट मिलने से अर्चना वर्मा काफी मजबूती से चुनाव लड़तीं। यही वजह रही कि लखनऊ में भाजपा कार्यालय में अर्चना वर्मा के सदस्यता ग्रहण करने के कार्यक्रम को भव्य स्तर पर आयोजित किया गया।

