Shahjahanpur News: असंतोष को दूर करने की कवायद में जुटे राजनीतिक दल
शाहजहांपुर। भाजपा के उम्मीदवारों की सूची जारी होने के साथ ही निकाय चुनाव की राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है। टिकट न मिलने से खफा दावेदारों के गुस्से से संभावित नुकसान के मद्देनजर सभी पार्टियां उन्हें मनाने की कवायद में जुट गईं हैं। दावेदारों को भविष्य में उनके लिए कुछ बेहतर करने का आश्वासन दिया जा रहा है।
भाजपा में 20 से ज्यादा लोगों ने महापौर पद के टिकट के लिए आवेदन किया था। नामांकन की अंतिम तारीख के एक दिन पहले सूची आने का इंतजार कर रहे सभी दावेदार टिकट के प्रति आशान्वित थे, लेकिन शाम को सपा प्रत्याशी अर्चना वर्मा के भाजपा में शामिल होने और थोड़ी देर बाद भाजपा से उनके महापौर प्रत्याशी बनने की घोषणा से दावेदारों के चेहरे लटक गए। भाजपा को भी अंदरखाने एहसास था कि टिकट की घोषणा होते ही असंतोष तेजी से बढ़ेगा। यही वजह रही कि टिकट फाइनल होने के बाद प्रत्याशी अर्चना वर्मा के साथ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर व अन्य पदाधिकारी लखनऊ से सीधे पूर्व सभासद वेदप्रकाश मौर्य के घर पहुंचे।
सुरेश खन्ना ने कहा कि वेदप्रकाश की पत्नी का नाम भाजपा से टिकट के दावेदारों की सूची में सबसे ऊपर था लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने अर्चना वर्मा को टिकट दिया है। उन्होंने सभी भाजपाइयों से अर्चना को पूरी ताकत से चुनाव लड़ाने और जिताने की अपील की। पिछले चुनाव में पुवायां नगर पालिका अध्यक्ष पद के प्रत्याशी डॉ. सुधीर गुप्ता को संजय गुप्ता ने हराया था। इस बार संजय गुप्ता को भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया है। इस पर कुछ लोगों ने विरोध दर्ज कराया है।
सोशल मीडिया पर दिखा असंतोष
भाजपा से जुड़े दावेदारों में से अधिकतर ने खुलकर तो टिकट के फैसले पर सवाल नहीं उठाए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर उठ रने हैं। भाजपा से अपनी पत्नी अनीता बाथम के लिए टिकट मांग रहे पंकज बाथम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के पास केवल दूसरे दलों से आने वालों के लिए दरी बिछाने का काम ही रह गया है। उन्होंने टिकट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट की हैं। सपा में दूसरी बार प्रत्याशी तय होने पर भी सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया गया। एक महिला नेता ने वैश्य समाज की प्रत्याशी को टिकट न देने के फैसले पर सवाल उठाए।