बरेली

Bareilly: मजार हटाने पर मचा हंगामा, हाईवे पर लगा लंबा जाम; राहगीरों को पीटा

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There was an uproar over removal of Syed Madina Shah tomb to widen the road

मजार हटाने को लेकर हंगामा
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत बाईपास पर रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के आगे सैय्यद मदीना शाह की मजार है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, वह अवैध निर्माण है और चौड़ीकरण के दायरे में आ रही है। विभाग ने प्रशासन को पत्र लिखा तो बुधवार दोपहर 12 बजे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रत्यूष पांडेय टीम के साथ कार्रवाई करने पहुंचे। सूचना पर वहां भीड़ जुटने लगी। आईएमसी के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और नारेबाजी करते हुए हाईवे पर जाम लगा दिया।

सूचना मिलते ही सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोग

पीलीभीत बाईपास का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग ने प्रशासन को पत्र लिखकर कब्जे की बात बताई। प्रशासन की टीम कब्जा हटाने पहुंची, मगर भीड़ देखकर लौट आई। इधर, कार्रवाई की सूचना पर मजार से जुड़े सैंकड़ों लोग वहां पहुंच गए और हाईवे पर जाम लगा दिया।

हाईवे पर प्रदर्शनकारियों ने मचाया हंगामा

चार घंटे तक चले प्रदर्शन और जाम को खुलवाने कोई नहीं पहुंचा। कवरेज करने पहुंचे पत्रकार की पिटाई कर दी। उसका स्कूटर तोड़ दिया और मोबाइल फोन भी छीन लिया। किसी तरह उसने खुद को बचाया, मगर प्रदर्शनकारी उसके स्कूटर की चाबी भी निकाल ले गए। मजार कमेटी, आईएमसी और प्रशासनिक अधिकारियों की वार्ता दूसरी जगह चलती रही। तब तक प्रदर्शनकारी हाईवे पर हंगामा काटते रहे।

सड़क चौड़ी करने के लिए मजार को हटाना है

सीओ तृतीय आशीष प्रताप सिंह ने बताया कि मैं एसडीएम के साथ था। नायब तहसीलदार और इंस्पेक्टर के साथ कांवड़ियों के लिए रूट देख रहे हैं। वहां कोई जाम और हंगामे की सूचना ही नहीं है। आईएमसी प्रवक्ता डॉ. नफीस ने बताया कि 2007 में सड़क का चौड़ीकरण हुआ था। उस समय भी मजार को हटाने की बात हुई थी। हमने उस समय सात मीटर जमीन प्रशासन को दी थी। अब फिर चौड़ीकरण की बात हो रही है। मेरा ये कहना है कि 1921 में बरेली शहर बसा, उस समय का नगर निगम का नक्शा निकलवा लिया जाए। उसके बाद जो धार्मिक स्थल अवैध बने, सबको हटा दिया जाए। यह मजार 1921 से पहले की है। हाईवे जाम करने, पत्रकारों को पीटने का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रत्युष पांडेय ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से हमें पत्र मिला था। उसमें कहा गया है कि पीलीभीत बाईपास पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय के आगे सड़क के किनारे अवैध निर्माण है। मौके पर पहुंचे तो वह मजार थी। हमें कार्रवाई करनी थी। उसके लिए पुलिस बल की जरूरत थी, जो नहीं मिल सका। इसके बाद हम लौट आए। मौजूदा हालात के बारे में उच्चाधिकारियों को बता दिया गया है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि पुलिस को जब लोगों के इकठ्ठे होने की जानकारी हुई तो पुलिस मौके पर गई थी। धार्मिक स्थल के मामले में प्रशासन के अधिकारियाें व धार्मिक स्थल कमेटी के साथ बैठक की गई थी।


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