बदायूं

Budaun News: निराश न हों, करियर की राह में बाधा नहीं है कम नबंर

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अधिकारी व प्रधानाचार्य बोले- नंबर कम आने का मतलब यह नहीं कि जीवन की परीक्षा में हो गए असफल

सलाह – आगे और करें मेहनत, एक बार नहीं तो दूसरी बार सफल होंगे

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। यूपी बोर्ड का हाईस्कूल व इंटरमीडियट का रिजल्ट आने के बाद जिले के तमाम छात्र-छात्राएं अच्छे नंबर आने से खुश हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं, जिनके कम नंबर आए हैं या फिर वे अनुत्तीर्ण हो गए हैं। ऐसे में उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आगे चलकर उन्हें और कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। तमाम ऐसे उदाहरण हैं, जहां कम नंबर आने पर भी लोगों ने हार नहीं मानी और अपना परिश्रम जारी रखा।

अगर हाईस्कूल में कम नंबर आए तो इंटरमीडियट में और अच्छा परिणाम हासिल किया। यहां भी सफल नहीं हुए तो आगे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और अच्छे पदों पर पहुंचे। शिक्षाविदों समेत अधिकारियों का कहना है कि अब पढ़ाई का तरीका बदल गया है। एक जमाना था जब कम नंबर आने पर बच्चे परिजनों की उलाहना सहते थे। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो अब तो परिवार वाले भी बच्चों का सहयोग ही करते हैं। यह ठीक बात है कि आज अच्छे नंबरों की होड़ लगी है लेकिन इसके साथ-साथ छात्रा-छात्राओं को जिंदगी का असली सबक भी सीखना चाहिए। परिश्रम चाहे कैसा भी, हमेशा अच्छे ही परिणाम देता है।

– प्रत्येक बच्चा चाहता है कि उसके अच्छे नंबर आएं। अगर कम नंबर आ भी गए तो यह अंतिम परीक्षा नहीं है। इससे आगे भी कई परीक्षाओं से गुजरना है। हमारे विभाग में कई ऐसे उदाहरण हैं कि जिन लोगों के शुरुआती दौर में नंबर कम आए थे, बाद में उन्होंने मेहनत करके अपना मुकाम हासिल किया और आज के दौर में वह कहीं न कहीं अधिकारी बने बैठे हैं। आज कई ऐसे नेता हैं, जिनके कम नंबर आए पर देश में उनका नाम है। अपने भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत है। कहीं घबराने की आवश्यकता नहीं है। पहले पढ़ेें, फिर समझें और समस्या का हल करें।

-मनोज कुमार, डीएम

– अगर किसी कारणवश परीक्षा में नंबर कम आते हैं तो छात्र-छात्राओं को घबराने की जरूरत नहीं है। वह और अच्छी पढ़ाई करके अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं। अच्छी मेहनत करेंगे तो उसके परिणाम भी अच्छे आएंगें। कभी मेहनत बेकार नहीं जाती। उसका फल कुछ न कुछ जरूर मिलता है। फिर चाहे किसी भी क्षेत्र में मेहनत की गई हो। छात्र-छात्राओं को बस मन लगाकर पढ़ना चाहिए। मानसिक संतुलन बनाए रखें। जीवन में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक बार सफल नहीं होंगे तो दूसरी बार होंगे। मन लगाकर पढ़ते रहें।

– डॉ. ओपी सिहं, एसएसपी

– मंगलवार को हाईस्कूल-इंटरमीडियट का रिजल्ट जरूर आया है लेकिन उससे पहले ही हमने सभी बच्चों को स्कूल बुला लिया था। सबको हमने समझाया था कि अगर किसी बच्चे के कम नंबर आते हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर हाईस्कूल में कम नंबर आएं हैं, तो वह इंटरमीडियट में और मेहनत करें। अगर कहीं कुछ पूछने की जरूरत पड़ रही है तो इसमें शर्माएं नहीं। अध्यापक से जरूर पूछें, इससे कम से कम उसकी जानकारी और मजबूत होती है। अगर पढ़ाई कर रहे हैं। तो उसका अच्छी तरह से अध्यन कर लें।

– अमिता आलोक, प्रधानाचार्य पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इंटर कॉलेज

– हमारे कॉलेज की एक छात्रा हाईस्कूल में टॉपर रही। इस बार इंटरमीडियट में उसके केवल चार नंबर कम आए। जब उसने अपना रिजल्ट देखा तो वह फूटफूटकर रोने लगी। बोली कि अब उसका नाम बोर्ड पर नहीं लिखा जाएगा। हमने उसे समझाया कि कभी-कभी बच्चों से चूक हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि हारकर बैठ जाएं। अपना हौसला और मजबूत करो। मेहनत करो, देखिए आपके नंबर और अच्छे आएंगे। हम तो हर साल बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए अलग से उन्हें सम्मानित करते हैं। इस बार भी प्रत्येक विषय के टॉपर बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। जिन बच्चों के कम नंबर आएं हैं। उसकी समीक्षा करेंगे। बच्चों को प्रेरित करेंगे।

– डॉ. अमलेश गुप्ता, प्रधानाचार्य केदारनाथ महिला इंटर कॉलेज


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