Bareilly News: संघर्ष के दम पर तय किया 186 साल का सफर
बरेली। एतिहासिक विरासत को संजोए बरेली कॉलेज सोमवार को 186वां स्थापना दिवस मनाएगा। कॉलेज का यह 186 वर्षों का सफर संघर्ष और सफलता से भरा है। जब भी कॉलेज के अस्तित्व पर संकट मंडराया, जनसहयोग से यह दोबारा और निखरकर सामने आया। अब कॉलेज में नई शिक्षा नीति के तहत अध्ययन हो रहा है। नैक मूल्यांकन कराने की भी तैयारी है।
बरेली कॉलेज के अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 1837 में नौमहला मस्जिद के पास एक सरकारी स्कूल के रूप में बरेली कॉलेज की शुरुआत हुई थी। पहले वर्ष 57 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया और रोजर्स इसके पहले हेडमास्टर रहे। फिर 1857 की क्रांति की आग बरेली कॉलेज तक पहुंची। क्रांतिकारियों ने प्राचार्य डॉ. कारलोस बक की हत्या कर दी और कॉलेज बंद हो गया। वर्ष 1859 में कॉलेज की पुनर्स्थापना हुई। वर्ष 1877 में आर्थिक संकट के चलते कॉलेज बंद हुआ था। तब उप प्राचार्य पंडित छेदालाल के प्रयासों से जयपुर के राजा जगत सिंह की अध्यक्षता में कॉलेज के फिर से संचालन के लिए सेंट्रल कमेटी बनी थी।
इसमें देशभर के रजवाड़ों और रईसों ने 80 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग दिया था। इनमें लाॅर्ड रिपन और एओ ह्यूम भी शामिल रहे। तब वर्ष 1884 में बरेली कॉलेज फिर शुरू हुआ था। शुरुआत में कॉलेज की संबद्धता कलकत्ता विश्वविद्यालय से थी। वर्ष 1884 से यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ। वर्ष 1927 में आगरा विश्वविद्यालय और आखिर में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इसे जोड़ा गया।
रामपुर के नवाब ने दान में दी थी 110 एकड़ भूमि
1904-05 में कर्जन के शिक्षा अधिनियम के तहत बरेली कॉलेज के प्रबंध तंत्र को सरकार ने आगाह किया कि अगर कॉलेज अपना पृथक भवन बनाकर उसमें पढ़ाई शुरू नहीं करता तो अनुदान बंद हो जाएगा। पंडित प्रताप नारायण ने कॉलेज को बचाने का मोर्चा संभाला। धन जुटाया पर भूमि की जरूरत थी। प्रबंध तंत्र की मांग पर रामपुर के नवाब ने 110 एकड़ भूमि बरेली काॅलेज को दान में दी थी। 17 जुलाई 1905 को इसी परिसर में सभागार का शिलान्यास रुहेलखंड आगरा प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर जेम्स डिग्शलाट्स ने किया। वहीं, 17 जुलाई 1906 को भवन का उद्घाटन हुआ।
आज कॉलेज में होगा पौधरोपण
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कॉलेज प्रशासन ने तैयारी कर ली है। प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि सुबह प्राचार्य, चीफ प्रॉक्टर, डीएसडब्ल्यू समेत अन्य सभी शिक्षक पौधरोपण करेंगे। कॉलेज में स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई के बाद माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उधर, कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के बैनर तले अस्थायी कर्मचारी भी पौधरोपण करेंगे और केक काटेंगे।
– रुहेलखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सर्वाधिक पुराना कॉलेज होने का गौरव।
– कॉलेज के छात्र कृपानंदन ने सन 1947 से पहले ही फहरा दिया था तिरंगा।
– स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियाें का ठिकाना था काॅलेज का आजाद छात्रावास।
– भारत छोड़ो आंदोलन, आजाद हिंद फौज के लिए छात्रों ने जुटाया था धन।
– देश के चौथे उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक बरेली कॉलेज के छात्र थे।
– प्रो. वसीम बरेलवी व अन्य साहित्यकार शिक्षक के रूप में दे चुके हैं सेवाएं।
– दस हजार संस्थागत और 30 हजार से ज्यादा व्यक्तिगत विद्यार्थियों का भार।
– साल 2012 में बरेली कॉलेज ने नैक मूल्यांकन में हासिल किया था ए ग्रेड।


