Budaun News: गोबर को फेंक दिया जाता है इधर-उधर, कैसे बनेंगे उपले
बदायूं। मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग को सभी छुट्टा पशुओं को गोआश्रय केंद्रों में रखने का निर्देश दिया है, साथ ही इनके गोबर से उपले बनाने को कहा गया है। इसके पीछे मंशा है कि इन उपलों का उपयोग अंत्येष्टि कार्य में किया जा सके। लेकिन, गोआश्रय स्थलों से गोबर को एकत्र करके इधर-उधर फेंक दिया जाता है। ऐसे में उपले कैसे बनेंगे यह एक सवाल बनता जा रहा है।
जिले में काफी संख्या में सड़कों से लेकर खेतों तक में गोवंश घूम रहे हैं, जो आम लोगों से लेकर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने गोआश्रय केंद्रों को खोला गया था। फिलहाल अब 237 गोआश्रय केंद्र यहां मौजूद हैं। इन केंद्रों पर करीब 21 हजार गोवंश रह रहे हैं, जिनका भरण पोषण शासन द्वारा किया जा रहा है। सभी केंद्रों पर इनकी देखभाल के लिए केयरटेकर तैनात किए गए हैं। इन सबका खर्च शासन द्वारा किया जा रहा है, लेकिन अब प्रदेश सरकार ने गोआश्रय केंद्रों से ही आमदनी करने का नया तरीका तलाशा है।
अब गोआश्रय केंद्रों पर गोवंश के गोबर को बेचने या फिर उनके उपले बनाकर बेचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि यहां पर बनने वाले अधिकांश उपलों का उपयोग अंत्येष्टि जैसे कार्य में किया जाए। लेकिन जिले में शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। अब गोबर कई-कई दिनों तक गोशाला में इधर-उधर पड़ा रहा था, बाद में इधर-उधर फेंक दिया जाता है।
वर्मी कंपोस्ट बनाने के दिए थे निर्देश, उनका भी नहीं हो रहा पालन
जिले में सभी गोशालाओं में एक-एक वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसको लेकर शुरुआत में कई गोशालाओं में वर्मी कंपोस्ट बनाए गए थे, लेकिन उनका भी पालन नहीं हो पा रहा है। गोबर को इधर-उधर फेंक दिया जाता है।
शासन से निर्देश मिले हैं कि गोबर के उपले बनाए जाए, अभी चुनाव चल रहा है। चुनाव के बाद इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. निरंजन सिंह मलिक, सीवीओ