Budaun News: पेयजल संकट… मरीजों के हलक सूखे, इमरजेंसी में भी पानी का टोटा

उझानी अस्पताल में पेयजल किल्लत बताते मरीजों के तीमारदार। संवाद
उझानी (बदायूं)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीजों और उनके तीमारदारों को पेयजल के लिए परिसर से बाहर का रुख करना पड़ता है। गर्मी के मौसम में तीमारदारों को भी अस्पताल में दो बूंद पानी नसीब नहीं हो पाता। यही नहीं, इमरजेंसी की तो हालत बहुत खराब है। किसी घायल की मरहम-पट्टी करके स्वास्थ्य कर्मियों को हाथ धोने के पानी का भी टोटा है। उन्हें भी गेट पर लगे नगर पालिका परिषद के स्टैंड पोस्ट का सहारा लेना पड़ता है।
अस्पताल परिसर में पेयजल की किल्लत तीन-चार महीना से बनी हुई है। पहले यहां तीन इंडिया मार्का हैंडपंप हुआ करते थे। एक खराब है तो दूसरे का नामोनिशान भी नहीं है। तीन महीना पहले कोरोना संक्रमितों के लिए दो हॉल का निर्माण हुआ तो एक हैंडपंप हटा दिया गया। पास में सबमर्सिबल पंप था, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी इसकी जानकारी से इन्कार कर रहे हैं।
शुक्रवार को तीमारदारों में बरसुआ के नेतराम और जमरौली निवासी राजवीर ने बताया कि पानी के लिए उन्होंने जिससे भी पूछा, सभी का यही कहना था कि गेट के बाहर लगी प्याऊ से बोतल भर लाइए। इसी तरह इमरजेंसी में पानी की किल्लत को लेकर फार्मासिस्ट नथन सिंह ने बताया कि पानी के अभाव में स्वास्थ्य कर्मियों को भी दिक्कत हो रही है। कभी-कभी तो मरहम-पट्टी के बाद हाथ धोने के लिए भटकना पड़ जाता है।
कंडम भवन के पास बनते हॉल तो बच जाता हैंडपंप
तीन महीना पहले जिस स्थान पर कोरोना संक्रमितों के लिए दो हॉल का निर्माण कराया गया है, उसके चयन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तो यह कि सबमर्सिबल और इंडिया मार्का हैंडपंप उसकी चपेट में आ गया। दूसरा, दो हॉल की वजह से अस्पताल परिसर में एंबुलेंस से मरीजों को उतारने में दिक्कत होती है। तत्कालीन चिकित्साधीक्षक ने मरीजों की दिक्कतों पर गौर नहीं किया था। स्वास्थ्य कर्मचारी भी बताते हैं कि दोनों हॉल कंडम भवन के पास बना दिए जाते तो न पेयजल संकट होता और न हीं परिसर की सूरत बिगड़ती।
इमरजेंसी में पेयजल सुविधा बहाली के लिए बृहस्पतिवार दोपहर से ही कोशिश शुरू कर दी गई है। गेट के पास ही पालिका की पेयजल पाइप लाइन है। उसी से इमरजेंसी की लाइन जुड़ेगी। इसके लिए पालिका के ईओ से भी बात हो चुकी है। – राजकुमार गंगवार, चिकित्साधीक्षक