कर्बला की जंग सच्चाई के लिए संघर्ष की मिसाल है : नवेद मियां
रामपुर। शाही औकाफ के मुतवल्ली रहे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने बृहस्पतिवार को इमामबाड़ा खासबाग में रोशनी की और यौमे आशूरा के जुलूस व अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों का जायजा लिया।
पूर्व मंत्री नवेद मियां ने बताया कि आशूरे के दिन यानी दस मुहर्रम का विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक में स्थित कर्बला में हुई यह जंग सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। इसमें हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कत्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यजीद है, इस्लाम ज़िंदा होता है हर करबला के बाद। नवेद मियां ने बताया कि दस मुहर्रम पर जरीह का जुलूस इस बार भी परंपरागत तरीके से निकाला जाएगा, जिसकी सभी तैयारियां पूरी हैं।
इससे पूर्व जरीह, अलम और मेंहदी के जुलूस निहायत अकीदत, एहतेराम और गम के माहौल में निकाले जा चुके हैं। इमामबाड़ा खासबाग में मौलाना असगर अहमद नकवी ने मजलिसों को खिताब किया। इसके अलावा इमामबाड़ा किला, मकबरा जनाबे आलिया, गुलजारे रफत, गुलशने फातिमा में मजलिसों का सिलसिला जारी है। इस मौके पर पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां, मुसरिम आरिफ हुसैन, रिज़वान हुसैन और मंसूर हुसैन आदि मौजूद रहे।


