रेस्क्यू सेंटर : काम की सुस्त गति ने बिगाड़ा खेल, किस्त रुकने से अटका काम

निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर । संवाद
पीलीभीत। पूरनपुर में सामाजिक वानिकी क्षेत्र के गोपालपुर बीट में निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर का काम काफी सुस्त गति से चल रहा है। कार्यदायी संस्था अभी पहली किस्त की धनराशि को ही खर्च नहीं कर सकी है। ऐसे में एक दिन पूर्व हुई बैठक में वनमंत्री ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए डीएफओ को अक्तूबर माह तक फेज एक का काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इधर, निर्माण के दायरे में आने वाले 38 पेड़ों को कटवाने की प्रक्रिया भी समय से पूरा कराने के लिए कहा गया है।
आपात स्थिति में अब बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू के बाद बाहर नहीं भेजा जाएगा। इसके लिए पीलीभीत में टाइगर रेस्क्यू सेंटर को मंजूरी देकर शासन ने निर्माण के लिए पहले चरण में 472 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया। इस बजट से पूरनपुर सामाजिक वानिकी की गोपालपुर बीट में काम शुरू कराया गया। सीएंडडीएस संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई।
दो चरणों में होने वाले कार्य के लिए 10 करोड़ की कुल लागत मंजूर की गई थी। पहले चरण के काम के लिए जारी बजट से काम तो शुरू किया गया, लेकिन काम के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई गई। इस कदर सुस्त गति से काम किया जा रहा है कि अब तक पहली किस्त ही खर्च नहीं हो पाई है। ऐसे में काम के समय से पूरा न हो पाने की आशंका उत्पन्न हो गई है। गत दिनों जब इसकी समीक्षा की गई तो पाया गया कि पूरनपुर में पहली किस्त का ही पूरा उपयोग नहीं हो सका है। बताया गया कि अगस्त तक जारी बजट में से 231 लाख रुपये ही खर्च हो सके हैं, जबकि 472 लाख रुपये खर्च होने हैं।
इस उदासीनता को देखते हुए शासन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दूसरी किस्त पर रोक लगा दी है। रोक लगने से कार्यदायी संस्था सवालों के घेरे में आ गई है। ऐसे में तय समय में सेंटर का पूरा निर्माण होने पर संकट के बादल छा गए हैं। ऐसे में वनाधिकारी भी तय समय में काम पूरा कराने में अब जुट गए हैं।
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10 बाघों और तेंदुुओं की होगी व्यवस्था
रेस्क्यू सेंटर में एक साथ 10 बाघ और तेंदुओं को रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही अन्य सारी जरूरत भी उपलब्ध होगी। रेस्क्यू सेंटर पर चिकित्सकों के अलावा अन्य टीमें भी तैनात रहेंगी। हिंसक होने के साथ व्यवहार में परिवर्तन और बीमार होने की स्थिति में रेस्क्यू सेंटर वन्यजीवों का सहारा बनेगा। यहां पर वन्यजीवों के रहने के लिए बाड़े, फीडिंग चैंबर, मेडिकल सुविधाएं, कीपर्स आदि मुहैया कराए जाएंगे। इसके अलावा तालाब भी विकसित किए जाएंगे। वन्यजीवों को पानी की कमी महसूस न हो सके। इसके लिए तालाबों में सोलर पंप लगाकर से पानी भरा जाएगा। इसके अलावा अन्य जरूरी सुविधाएं रेस्क्यू सेंटर पर मुहैया कराई जाएंगी।
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बारिश के कारण काम रुक गया था। इसके चलते देर हुई है। अब मौसम सही है और कार्यदायी संस्था को पहली किस्त का काम पूरा करने के लिए कहा गया है। अक्टूबर तक काम फेज एक का पूरा करा दिया जाएगा। इसके साथ ही जद में आने वाले 38 पेड़ों को लेकर भी एनओसी की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराया जाएगा।- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर । संवाद



