पीलीभीत

Pilibhit News: ऑपरेशन कराना है तो कहीं और जाइए, मेडिकल कॉलेज में नहीं अब कोई सर्जन

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If you want an operation then go somewhere else, there is no surgeon in the medical college now

जिला अस्तपताल में बना ऑपरेशन कक्ष ।

पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) में अब मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो सकेंगे। वजह यह है कि अब यहां कोई जनरल सर्जन नहीं है। वर्ष 2019 से संविदा पर तैनात सर्जन ने शुक्रवार को नौकरी छोड़ दी। वह अब प्राइवेट प्रैक्टिस करेंगे। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को फिलहाल ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल सकेगी।

मेडिकल कॉलेज की सौगात तो जिले के लोगों को मिल गई, लेकिन इसका हाल सीएचसी से भी बुरा है। यहां लगातार स्टाफ कम होता जा रहा है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। कुछ माह पहले काउंसलिंग के बाद यहां 26 जूनियर डॉक्टर ने ज्वॉइन किया था। दो-तीन महीने काम करने के बाद डॉक्टर चले गए। मेडिकल कॉलेज में अब 14 जूनियर डॉक्टर ही बचे हैं। बात अगर विशेषज्ञों की करें तो यहां महज छह विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद से यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पहले ओपीडी में 1,000-1,200 मरीज ही पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 2,000 तक पहुंच गई है। मेडिकल कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. संजीव सक्सेना के अलावा संविदा पर तैनात जनरल सर्जन डॉ. नितिन मलिक थे। डॉ. मलिक अब नौकरी छोड़ चुके हैं। ऐसे में जनरल ऑपरेशन के लिए अब यहां कोई सर्जन नहीं बचा। लिहाजा अब मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो सकेंगे। अब से पहले मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन दो-तीन ऑपरेशन हो रहे थे। इस साल अब तक 586 मरीजों के आपरेशन हो चुके हैं।

26 में सिर्फ छह डॉक्टर ही हैं मौजूद

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। 26 स्वीकृत पदों पर महज छह डॉक्टर हैं। इनमें प्रभारी प्राचार्य आर्थोपेडिक डॉ. संजीव सक्सेना, फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर, चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह, ईएनटी डॉ. प्रवीन कुमार शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरभि सिंह व डॉ. एसके चावला है। इसके अलावा एनेस्थेटिस्ट डॉ. राधेश्याम गंगवार हैं। इन्हीं डॉक्टरों से अस्पताल की ओपीडी के अलावा इमरजेंसी ड्यूटी, वीआईपी ड्यूटी, शिविर, गवाही आदि के काम लिए जा रहे हैं। डॉक्टरों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

मेडिकल काॅलेज में वर्ष 2023 में हुए ऑपरेशन

जनवरी 57

फरवरी 77

मार्च 71

अप्रैल 62

मई 59

जून 60

जुलाई 77

अगस्त 91

सितंबर 32

वर्जन:

जनरल सर्जन के जाने के बाद बाद किसी अन्य डॉक्टर को जिला अस्पताल में नियुक्त किया जाएगा। मरीजों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होनी दी जाएगी। – डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज


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