Bareilly News: दोहरे हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद
बरेली। 30 साल पहले बच्चों के विवाद में हुई दो लोगों की हत्या के मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद और चार लोगों को छह-छह माह कैद की सजा सुनाई। मुकदमे के दौरान सात अभियुक्तों की मौत हो गई। सजा का यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने किया।
28 मई, 1993 को लिखाई रिपोर्ट में वादी दुर्गाप्रसाद ने बताया कि उनके गांव सकुटिया में कहा कि उनके गांव के सियाराम और विशंबर के बच्चों में जंगल में जानवर चराते समय कहासुनी हो गई थी। इस पर दोनों के परिवार गझड़ने लगे। इस पर वह और उनका छोटा भाई हीरालाल, बड़े भाई खंदारी सिंह, भतीजा राजपाल, राजाराम, सोहन लाल, गुलाब शोरगुल सुनकर बीच-बचाव करने पहुंचे।
विशंबर, सिपाही, साहूकार, हरि सिंह आदि असलहे और लाठियां लेकर आ गए। राधाकृष्ण, उसका लड़का भारत, रामवीर, पप्पू, बाबू, रमेश भी आ गए। समझाने पर ये लोग नहीं माने और एकराय होकर वादी व उसके परिजनों के साथ लाठी-डंडों व धारदार हथियार से हमला कर दिया। भारत ने दुर्गाप्रसाद को धारदार तबल से प्रहार किया। रामवीर, भूरे, ननका, हरिसिंह ने बंदूकोें से फायरिंग शुरू कर दी। इसमें खंदारी, राजपाल, हरदूारी, रंजीत, रामदयाल और वेदराम घायल हो गए। बाद में खंदारी सिंह व राजपाल मौत हो गई।
जांच के बाद विशंबर, सिपाही, साहूकार, हरि सिंह, राधाकृष्ण, भारत, पप्पू, बाबू, रमेश, नरेश, तुलाराम, भूरे, ननका और एक अन्य के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया गया। नाबालिग आरोपी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी। मुकदमे के दौरान विशंबर, सिपाही, हरिसिंह, राधाकृष्ण, भारत, बाबू और नरेश की मौत हो गई। कोर्ट ने भूरे व ननका को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 18-18 हजार रुपये जुर्माना और साहूकार, पप्पू, रमेश व तुलाराम को छह-छह माह की कैद और दाे-दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा- अभियुक्तों ने किया निर्दयतापूर्ण आचरण
बुजुर्ग दोषी अदालत में अपने बुढ़ापे का वास्ता देकर कम सजा देने की मांग कर रहे थे, लेकिन कोर्ट ने कहा कि बच्चों में विवाद में बड़ों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उसे शांत करें, लेकिन इस मामले में अभियुक्तों ने यह दिखाया कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं है। इसके उलट उन्होंने निर्दयतापूर्ण आचरण किया और नतीजतन दो लोगों की जान चली गई।


