Pilibhit News: इमरजेंसी, ओपीडी और वीआईपी ड्यूटी सबके लिए सिर्फ 8 डॉक्टर

मेडिकल कॉलेज में लगी लाइन । संवाद
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज बने हुए सात महीने से अधिक हो गए हैं, लेकिन आजतक यहां डॉक्टराें की कमी पूरी नहीं हो सकी है। यहां बता दें कि बीते दिनाें अस्पताल के दौरे पर आए गन्ना मंत्री संजय गंगवार ने भी डिप्टी सीएम से बात कर जल्द और डॉक्टरों को यहां भेजने को कहा था, लेकिन वह अब तक नहीं आ सके हैं।
पिछले दिनों शासनस्तर से आठ डॉक्टरों की नियुक्ति मेडिकल कॉलेज के लिए हुई थी। इसमें से मात्र चार जूनियर डॉक्टरों ने ही अभी ज्वाइन किया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के लिए 16 अन्य स्टाफ को आना था, इसमें प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर आदि शामिल हैं। शासन स्तर से नियुक्ति भी हो चुकी है, लेकिन अब तक उनको नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा सके हैं, जिसकी वजह से वह भी नहीं आ पाए।
मेडिकल कॉलेज बनने के कुछ दिन बाद ही जिले को 27 जूनियर डॉक्टर मिले थे। इसमें अधिकांश डॉक्टर नौकरी छोड़कर चले गए तो कुछ यहां आए ही नहीं। 27 में से मात्र 12 डॉक्टर ही बचे हैं। मेडिकल कॉलेज में बीते माह एक मात्र सर्जन भी चले गए थे, जिसके बाद सीएमओ स्तर से सर्जन डॉ. रितिका अग्रवाल को भेजा गया, जिन पर पूरे मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज के पुरुष विंग में मात्र आठ डॉक्टर हैं, जिनको ओपीडी के अलावा इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी आदि भी देखनी होती है।
लाइन में जब तक नंबर आता है तब तक बंद हो जाता है अस्पताल
मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1300 से अधिक मरीज पहुंचते हैं, जिसमें 600 से 700 मरीज बुखार के होते हैं। यहां बता दें कि मेडिकल कॉलेज में मात्र एक ही जनरल फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर हैं, जिनके लिए इतने मरीजों को देख पाना संभव नहीं। हाल यह होता है कि सुबह नौ बजे पर्चा बनवाने के बाद मरीज का नंबर एक-दो बजे तक आ पाता है। इसके बाद जब वह दवा की लाइन में लगता है, तब तक अस्पताल बंद हो जाता है। दवा लेने के लिए उसे फिर दूसरे दिन लाइन में लगना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज में करीब 16 लोगों का स्टाफ आना था, लेकिन शासनस्तर से उनको नियुक्ति-पत्र नहीं मिल पाए हैं। हालांकि पूरा प्रयास रहता है कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को कोई दिक्कतें न हो। जल्द ही स्टाफ आ जाएगा तब स्थिति और बेहतर हो जाएगी।
-डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्रचार्य, मेडिकल कॉलेज