बदायूं

जरीफनगर-नाधा मार्ग : आधी सड़क गायब… अफसर कह रहे एक साल बाद बनेगी

Connect News 24

Zarifnagar-Nadha road: Half the road missing, officials say it will be built after a year

जरीफनगर-नाधा मार्ग का टूट रहा रोड। संवाद

दहगवां। मुख्यमंत्री का आदेश है तो क्या, सरकारी विभाग काम अपने नियम से ही करेंगे। जरीफनगर से नाधा होते हुए चंदौसी जाने वाले मार्ग की हालत देखकर तो यही लगता है। ये रोड जगह-जगह टूट गई है। एक स्थान पर तो आधी सड़क ही गायब है।

लिहाजा भारी वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। रात में तो इधर से दोपहिया वाहन लेकर निकलना भी खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी एक साल बाद ही इसका निर्माण हो पाने की बात कह रहे हैं, क्योंकि इस सड़क का निर्माण हुए अभी आठ साल ही हुए हैं, जबकि पुनर्निर्माण नौ साल से पहले नहीं हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने सभी सड़कों को दिवाली से पहले गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोक निर्माण विभाग सड़कों में पैबंद लगाने में जुट गया। तय अवधि में सड़कों को गड्ढामुक्त करने की रिपोर्ट भी शासन को भेज दी, लेकिन जिले में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर क्या किया गया है, यह सड़कें खुद बयां कर रही हैं। कहीं घटिया पैचवर्क करके औपचारिकता निभा दी तो कहीं कागजों पर ही गड्ढे भर दिए गए।

ब्लॉक दहगवां क्षेत्र में जरीफनगर से नाधा होते हुए चंदौसी जाने वाली सड़क लोक निर्माण विभाग के अफसरों की लापरवाही की कहानी कह रही है। क्षेत्र के लोगों के लिए चंदौसी जाने के लिए यह सबसे कम दूरी वाला रास्ता है। ऐसे में अधिकांश लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं ताकि समय और धन दोनों की बचत हो सके, लेकिन यह रोड थानपुर गांव के पास टूट गई है। एक जगह तो आधी सड़क ही गायब हो गई है। इसकी वजह से इस मार्ग पर बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद है। छोटे वाहनों को निकलने में भी अब परेशानी होने लगी है।

25-30 किलोमीटर का आता है अंतर

दहगवां से बबराला होते हुए चंदौसी की दूरी 70-80 किलोमीटर है, जबकि दहगवां से जरीफनगर, रसूलपुर, नाधा, इस्लामनगर होते हुए चंदौसी की दूरी 45-50 किलोमीटर पड़ता है। 25-30 किलोमीटर कम दूरी होने की वजह से लोग चंदौसी आने-जाने के लिए इसी मार्ग को उपयोग करते हैं।

करीब आठ साल पहले बनी थी रोड

लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड एक ने इस रोड का निर्माण करीब आठ साल पहले कराया था। इक साल बाद ही सड़क में गड्ढे होने लगे तो विभाग की तरफ से पैच वर्क कराया गया, लेकिन इससे रोड की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। यातायात का अच्छा-खासा दबाव होने की वजह से एक गड्ढा भरता तो 10 नए हो जाते। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक, बजरी-कोलतार वाली सड़क की मियाद 9-10 साल होती है। इससे पहले सड़क पर दूसरी लेयर नहीं डाली जाती है। चूंकि इस सड़क को बने अभी आठ साल ही हुए हैं, सो दोबारा बनने के लिए अभी एक साल इंतजार करना होगा।

वर्जन-

कोलतार-बजरी की सड़क की मियाद 9-10 साल होती है। इसके बाद ही सड़क का पुनर्निर्माण कराया जा सकता है। ऐसे में यह सड़क अगले साल ही बनाई जा सकेगी। अभी सड़क पर पैचवर्क करा दिया गया है। जहां सड़क ज्यादा खराब है, वहां भी जल्द ठीक करा दी जाएगी। – देवपाल सिंह, एक्सईएन निर्माण खंड एक, लोक निर्माण विभाग

जरीफनगर-नाधा मार्ग का टूट रहा रोड। संवाद

जरीफनगर-नाधा मार्ग का टूट रहा रोड। संवाद


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button